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अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे लोक कलाकार प्रकाश गढ़वाली

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पहाड़ संस्कृति के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले लोक कलाकार व रंगकर्मी 68 वर्षीय प्रकाश मोहन गढ़वाली कमजोर आर्थिक हालात और सरकारी उपेक्षा के कारण दून के एक अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। कई बीमारियों से जूझ रहे प्रकाश गढ़वाली को सरकारी और गैरसरकारी स्तर पर आर्थिक सहायता की दरकार है।
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पौड़ी जिले में पोखड़ा ब्लॉक के ग्राम गवणी के मूल निवासी प्रकाश मोहन ने लोकगायक और रंगकर्मी के रुप में आकाशवाणी में 30 वर्ष और दूरदर्शन में करीब 15 साल अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में उनका परिवार कोटद्वार के रमेश नगर में रह रहा हैं। वह श्रीदेव सुमन, वीर चंद्रसिंह गढ़वाली, कण्वाश्रम की महिमा, माधव सिंह भंडारी, तीलू रौतेली, जीतू बगड़वाल, रामी बौराणी, बावन गढ़ों की धरती समेत कई वीरगाथाओं से जुड़े नाटकों का मंचन कर चुके हैं। देवी देवयनों की स्वाणि धरती, बड़ी आस करी अदो हे बाबा, बेटी बचावा बेटी पढ़ावा समेत कई गीत लेख और कविताएं भी उन्होंने लिखे हैं।
स्थानीय कलाकार दयाशंकर फुलारा, वीरेंद्र रावत, नवीन सुंदरियाल, गीता नेगी, आकाशवाणी व दूरदर्शन के कलाकार वीरेंद्र भंडारी और राकेंद्र रौथाण का कहना है कि उत्तराखंड की संस्कृति और परंपराओं को संजोकर जीवित रखने वाले कलाकारों को प्रदेश सरकार की अनदेखी के चलते दर-दर भटकने को मजबूर होना पड़ रहा है। सुषमा जखमोला और सुधीर बहुगुणा ने बताया कि वर्तमान में वे हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। प्रकाश की पत्नी शकुंतला गढ़वाली बताती हैं कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन उत्तराखंड की संस्कृति के संरक्षण और संवर्द्धन में लगा दिया, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति दयनीय होने के कारण उनका बेहतर इलाज नहीं हो पा रहा है।
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