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क्वारंटीन के बाद पहले भेजा घर, फिर वापस बुलाया

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लॉकडाउन में शासन की ओर से स्पष्ट निर्देश नहीं मिलने से कोविड-19 की ड्यूटी पर लगे राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसका खामियाजा क्वारंटीन किए गए प्रवासियों को भुगतना पड़ रहा है।
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रविवार को उस समय अफरातफरी मच गई, जब हाईकोर्ट के आदेशानुसार सात दिन तक संस्थागत क्वारंटीन में रहने के बाद 39 प्रवासियों को स्थानीय प्रशासन की ओर से उनके घरों के लिए रवाना कर दिया गया। इसकी सूचना पौड़ी के अधिकारियों के पास पहुंचते ही वे राजस्व कर्मियों पर भड़क गए। आनन फानन में प्रवासियों को आधे रास्ते से वापस बुलाया गया, जिसके कारण लोगों में प्रशासन के खिलाफ रोष है।
नायब तहसीलदार आरपी ममगाईं ने बताया कि 24 मई को महाराष्ट्र से पहुंचे 32 लोगों को हिंदू पंचायती धर्मशाला और सात लोगों को गुरुरामराय स्कूल स्थित संस्थागत क्वारंटीन सेंटरों में रखा गया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद शासन की ओर से रेड जोन से आने वाले सभी लोगों को कोटद्वार में सात दिन तक संस्थागत क्वारंटीन और सात दिन होम क्वारंटीन करने के निर्देश गए थे। इसके तहत रविवार को सात दिन संस्थागत क्वारंटीन पूरा कर चुके लोगों को स्थानीय प्रशासन ने अपने घरों को रवाना कर इसकी सूचना जिला प्रशासन को दी। सूचना मिलते ही एसडीएम पौड़ी ने सभी लोगों को वापस बुलाने के निर्देश दिए। जिस पर किसी प्रकार से बस चालक परिचालकों से संपर्क कर सभी को आधे रास्तों से वापस बुलाया गया। अब उनको लैंसडौन डेरियाखाल के होटलों में संस्थागत क्वारंटीन किया गया है। उधर, एसडीएम अंशुल सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट के नियम के अनुसार तो सात दिन संस्थागत और सात दिन होम क्वारंटीन ही है। लेकिन ये लोग मुंबई से आए थे और कई जगह क्वारंटीन के बाद भी कुछ लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसीलिए इन लोगों को वापस बुलाया गया है। रिपोर्ट नेगेटिव आने पर ही उनको घर भेजा जाएगा।
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