भूमि संरक्षण वन प्रभाग लैंसडौन के मटियाली रेंज में कार्यरत एक फायर वाचर की सोमवार रात मौत हो गई। वह पिछले कई दिनों से क्षेत्र के आरक्षित और सिविल वनों में लगी आग बुझाने में लगा था। सोमवार रात उसकी हालत बिगड़ने पर 108 सेवा से कोटद्वार राजकीय अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि फायर कर्मी की मौत के 15 घंटे बाद भी अधिकारियों ने मामले की जानकारी संबंधित डिवीजन के डीएफओ को नहीं दी गई। मंगलवार शाम को सूचना मिलते ही डीएफओ अंजनी कुमार त्रिपाठी ने मटियाली पहुंचकर मामले की जानकारी ली।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मटियाली रेंज में कार्यरत फायर वाचर चैत सिंह (47) पुत्र सरदार सिंह निवासी ग्राम बौंठा डाडामंडी कई दिनों से वन कर्मियों के साथ आग बुझाने में जुटा था। इसी दौरान उसकी हालत बिगड़ने लगी। सोमवार की रात वह मटियाली में लैंसडौन डिवीजन के वन दारोगा यशवंत सिंह रावत के क्वार्टर के पास ही रुक गया। रात को उसे खून की उल्टियां होने लगी तो वन कर्मियों ने 108 से उसे कोटद्वार अस्पताल भिजवाया। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। वन कर्मियों के अनुसार, दो दिन से वह आरक्षित वन क्षेत्र में आग बुझाने के लिए गया था। कोतवाली पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
विभाग छिपाता रहा मौत
एक दूसरे वन प्रभाग का मामला बताते हुए जिम्मेदार अधिकारी फायर कर्मी की मौत की खबर को मंगलवार दिन तक छिपाते रहे। वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में मामला आते ही खुलासा हुआ। मौत की असली वजह तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही पता चलेगी, लेकिन यह बताया जा रहा है कि कई दिनों से आग बुझाने के काम में लगे होने से चैत सिंह की तबियत खराब चल रही थी।