पहाड़वासियों को राजधानी से श्रीनगर के लिए मैक्सी कैब सेवा देने का सरकारी फरमान पर एक ही दिन अमल हुआ। सेवा बंद होने का कारण देहरादून से श्रीनगर के लिए सवारियां नहीं मिलना बताया जा रहा है। जबकि देहरादून-श्रीनगर के बीच कई टैक्सियां संचालित हो रही हैं। ऐसे में रोडवेज को सवारी न मिलना सवाल खड़े कर रहा है।
पहाड़वासियों की सबसे बड़ी दिक्कत राजधानी के लिए सीधी बस सेवाओं की कमी है। ऐसे में लोग या तो प्राइवेट बसों को बदल-बदलकर या फिर टैक्सियों से राजधानी आवागमन करते हैं। जून में मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजक्ट के तहत पहाड़ी क्षेत्रों के लिए रोडवेज मैक्सी-कैब सेवा शुरू हुई।
प्रचारित किया कि राज्य भर में बस सेवा से वंचित रूटाें पर कैब चलेंगी। पहले चरण में कुमाऊं के रामनगर डिपो में एक जून से कैब शुरू की गई। दूसरे चरण में देहरादून-श्रीनगर रूट पर सेवा की शुरुआत हुई।
18 जून को राजधानी से श्रीनगर पहली मैक्सी-कैब पहुंची। दोपहर बाद टैक्सी सवारी लेकर लौट गई। इसके बाद से यह टैक्सी दोबारा श्रीनगर नहीं पहुंची। उत्तराखंड परिवहन निगम के सहायक प्रबंधक बृजेश पुंडीर का कहना है कि अनुबंधित टैक्सी को श्रीनगर के लिए सवारी नहीं मिल पा रही हैं। इसलिए मैक्सी कैब नहीं चल रही है।
बस के समान है किराया
रोडवेज की ओर से अनुबंधित टैक्सी का किराया बस के समान 265 रुपये रखा गया है। टैक्सी को परिवहन विभाग से नौ सवारियों (चालक सहित) को ढोने की अनुमति मिली है। देहरादून में हिल डिपो और श्रीनगर में डिपो स्टेशन से टैक्सी संचालित होनी थी।