कोटद्वार। जल, वन के प्रति सभी जनमानस का जागरूक होना जरूरी है और यह हमारा पहला कर्तव्य होना चाहिए। इसके लिए भावनात्मक लगाव व जुड़ाव भी जरूरी है। मैती आंदोलन के प्रणेता पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार में जलस्रोत और वन संरक्षण में जनसहभागिता विषय पर कार्यशाला में यह बात कही। मैती आंदोलन पर चर्चा करते हुए कहा कि 1995 में शुरू हुआ मैती आंदोलन आज पूरे विश्व का जनांदोलन बनने के साथ ही शादी में भावनात्मक लगाव का प्रतीक बन गया है। प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से उनके इस आंदोलन की सराहना की। उन्होंने कहा कि पौधा लगाने भर से काम नहीं चलता। इसके संरक्षण की भी किसी न किसी को जिम्मेदारी लेनी होगी।
तभी यह एक पेड़ का रूप धारण करेगा और पर्यावरण संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा पाएगा। विश्व में इस आंदोलन के तहत लाखों पेड़ लग चुके हैं। उन्होंने निजी अनुभव भी साझा किए और महाविद्यालय परिसर में फलदार पौधा भी लगाया। विशिष्ट अतिथि राजकीय महाविद्यालय रामनगर के प्रो. एमसी पांडेय ने कहा कि जल और वन एक महत्वपूर्ण संसाधन है। इसके संरक्षण पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान देने की जरूरत है। जल्द ही रामनगर और कोटद्वार महाविद्यालय में पर्यावरण को लेकर कार्य किए जाएंगे।
पर्यावरणविद राजेश भट्ट ने पक्षियों की आवाजों में पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। जीएसटी कमिश्नर मितेश्वर आनंद ने कहा कि विश्व ग्लोबल वार्मिंग से जूझ रहा है। पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता है। जल संस्थान के ईई अभिषेक वर्मा ने कहा कि स्वच्छ जल सीमित मात्रा में इस पृथ्वी पर उपलब्ध हैं। हमें इसे संरक्षित रखना है। अध्यक्षता कर रहीं प्रभारी प्राचार्य प्रो. आशा देवी ने पर्यावरण संरक्षण की प्रतिज्ञा दिलाई। इस मौके पर प्रो. बीसी शाह, अंबेश पंत, हिमांशु बहुखंडी, डॉ. जुनिश कुमार, डॉ. नंदी गड़िया और डॉ. ऋचा जैन आदि मौजूद रहे। संचालन डॉ. संदीप कुमार ने किया।