कोटद्वार। बुधवार को यूपी और उत्तराखंड में एक साथ विधानसभा चुनाव हो रहे हैं, लेकिन कोटद्वार से सटे यूपी के मोटाढांक गांव में विधानसभा चुनाव की उत्तराखंड जैसी गहमागहमी नजर नहीं आ रही है। पौड़ी जिले के कोटद्वार विधानसभा सीट में जहां चुनाव की सरगर्मियों के चलते विकास के मुद्दों पर बात हो रही है, वहीं मोटाढाक समेत उसके समीपवर्ती गांवों में एक सन्नाटा पसरा है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके यहां के लोग यूपी की विधानसभाओं के लिए वोट तो डालते हैं, लेकिन उनके यहां कोई भी राजनीतिक दल और उनके प्रत्याशी वोट मांगने नहीं आते। इसकी एक प्रमुख वजह यह है कि उत्तराखंड बनने के बाद यहां के लोग उनके गांव को उत्तराखंड में शामिल करने की मांग करते आ रहे हैं।
अविभाजित उत्तर प्रदेश के दौरान पौड़ी जिले से सटे बिजनौर जिले के मोटाढाक, चतुरुवाला और देवेंद्र नगर कौड़िया के ग्रामीणों को बिजली, पानी, सिंचाई समेत सभी सुविधाएं कोटद्वार से मिलती थी। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से इन गांवों की मुश्किलें बढ़ती गईं। आज हालात यह हो गए हैं कि बिजली समेत कई बुनियादी सुविधाओं के लिए ये उत्तराखंड पर ही निर्भर तो हैं, लेकिन उत्तराखंड की ओर से इन गांवों को अब पहले जैसी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
पूर्व प्रधान मनमोहन दुतपुड़ी, प्रधान अनीता देवी व जगदेश्वरी रावत का कहना है कि विधानसभा चुनाव के कारण कोटद्वार में जहां विकास समेत कई मुद्दों पर बात हो रही है, वहीं यूपी के नजीबाबाद विधानसभा क्षेत्र में पड़ने वाले उनके इलाके में कोई भी प्रत्याशी वोट मांगने के लिए नहीं आता। उत्तराखंड के गांवों में जहां बिजली समेत सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, वहीं उनके गांवों में न तो पर्याप्त बिजली मिलती है और न ही अन्य सुविधाएं।
उत्तराखंड और यूपी के गांवों में विकास का अंतर साफ दिखाई देता है। यही वजह है कि मोटाढांक समेत यूपी के 61 ग्राम पंचायतें उत्तराखंड में शामिल होने की मांग करती आ रही हैं।
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