कोल्हूचौड़ फारेस्ट गेस्ट हाउस प्रकरण में लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ मयंक शेखर झा के निलंबन के विरोध में दो वन प्रभागों के कर्मचारियों और अधिकारियों ने बुधवार से कार्य बहिष्कार करते हुए धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारी वन कर्मियों ने तिलवाढांग डीएफओ दफ्तर के बाहर धरना-प्रदर्शन करते हुए राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने डीएफओ के निलंबन को बिना जांच के एकतरफा कार्रवाई बताया।
कहा कि जब तक उनका निलंबन वापस नहीं लिया जाएगा, तब तक वन कर्मी और अधिकारी काम पर नहीं लौटेंगे। वन कर्मियों के कार्य बहिष्कार से जंगल और वन्यजीव सुरक्षा संबंधी कार्य प्रभावित होने लगे हैं। लैंसडौन वन प्रभाग के मुख्यालय पर बुधवार को ताला जड़ा रहा, जिससे काम के लिए आए लोगों को बैरंग लौटना पड़ा।
पूर्व निर्धारित अल्टीमेटम के अनुुसार वन अधिकारी और कर्मचारी संघर्ष समिति के बैनर तले बुधवार को वन कर्मी और अधिकारी लैंसडौन वन प्रभाग के तिलवाढांग स्थित दफ्तर पहुंचे। यहां लैंसडौन वन प्रभाग और भूमि संरक्षण वन प्रभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों ने डीएफओ मयंक शेखर झा के निलंबन को सरासर गतल बताया।
समिति के अध्यक्ष आरपी पंत और मंत्री सतविंदर पाल, एसपी कंडवाल ने बताया कि वन कर्मियों और अधिकारियों के सभी संगठनों ने उनके आंदोलन को समर्थन दिया है। कहा कि वन कर्मचारी संगठन भारतीय वन सेवा के एक इमानदारी अधिकारी के पक्ष में खड़े हैं। कोल्हूचौड़ प्रकरण की निष्पक्ष जांच होने से पूर्व इसमें निलंबन का कोई औचित्य नहीं है। समिति की ओर से मुख्यमंत्री हरीश रावत से हस्तक्षेप की मांग की गई।
कहा कि जब तक निलंबन वापस नहीं लिया जाएगा, अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी। धरना-प्रदर्शन में संजय सागर, कपिल थपलियाल, मेहरबान सिंह रावत, संगीत कुमार, एसपी कंडवाल, विलोचन राणा, किशोरीलाल, सुरेंद्र सिंह चौहान, वीरेंद्र प्रसाद डोबरियाल, बीरेंद्र सिंह लिंगवाल, भूपेंद्र बिष्ट, राकेश वेदवाल, कपिल थपलियाल, मायामोहन कंडवाल, महेश सेमवाल, शीशपाल, अमित कुमार शामिल थे।