लैंसडौन के कालेश्वर मंदिर में कलश यात्रा निकाली
कोटद्वार। शारदीय नवरात्र के पहले दिन रविवार को क्षेत्र के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। घरों में घट स्थापना के साथ व्रत शुरू हुए, वहीं बाजारों में दिनभर चहल-पहल रही।
नवरात्र पर फलाहारी बाबा मंदिर स्थित नवदुर्गा मंदिर, सिद्धबली मंदिर, संतोषी माता मंदिर और सुखरो देवी मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया। आचार्य देवी प्रसाद भट्ट ने बताया कि हिमालय में जन्म लेने के कारण मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप को शैलपुत्री कहा जाता है।
सुखरो देवी मंदिर में आचार्य राकेश चंद्र लखेड़ा के सान्निध्य में नौ दिवसीय पूजा शुरू हुई। पहले दिन मंदिर समिति के अध्यक्ष राजाराम अणथ्वाल ने पूजा संपन्न कराई। दुगड्डा स्थित दुर्गा देवी मंदिर में भी धार्मिक अनुष्ठान हुए। श्रद्धालुओं ने मंदिर की परिक्रमा कर पूजा-अर्चना की। राजमार्ग पर जाम से बचाव के लिए पुलिस ने यातायात व्यवस्था संभाली।
उधर, श्री कालेश्वर मंदिर समिति की ओर से लैंसडौन के सूबेदार मोहल्ले से कलश यात्रा निकाली गई, जो मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। समिति अध्यक्ष राजेश ध्यानी ने बताया कि 18 अक्तूबर तक सुबह-शाम भजन-कीर्तन होंगे। 19 अक्तूबर को सुबह 11 बजे कन्या पूजन के साथ कार्यक्रम का समापन होगा। वहीं, बीरोंखाल और नैनीडांडा के मध्य ऊंची चोटी पर स्थित दीवा मंदिर खाटली में भी पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे।