श्रीनगर। कीर्तिनगर ब्लॉक की पूर्व ज्येष्ठप्रमुख व समाजसेवी किरन सिलवाल ने गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों के रेशनलाइजेशन किए जाने के लिए मुख्यमंत्री के माध्यम से केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को ज्ञापन भेजा है।
सिलवाल ने ज्ञापन में कहा कि केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से फरवरी 2012 में महापात्रा कमेटी का गठन किया गया था। पदों का रेशनलाइजेशन किए जाते समय कमेटी द्वारा राज्य सरकार के शासनादेशों का संज्ञान नहीं लिया गया। वर्ष 2009 से पूर्व यह राज्य विश्वविद्यालय था, कमेटी द्वारा राज्य सरकार के शासनादेशों का अवलोकन न करने से लिपिकीय संवर्ग को नुकसान उठाना पड़ा है।
वर्ष 1999 एवं 2004 के कर्मचारी आज भी एलडीसी के पद पर कार्यरत हैं। कहा कि महामाया जी की रेशनालाइजेशन कमेटी ने गढ़वाल विश्वविद्यालय के लिपिकीय सवर्ग तकनीकी संवर्ग का पिरामिड द्वेषभावना से बनाया है, जिस कारण कि वर्ष 1994 व 1999 एवं 2004 में नियुक्त एलबीसी को आज तक एक भी पदोन्नति नहीं दी गई। जिस कारण यह कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं। जबकि कमेटी ने लेखाकार के पदों को सेक्शन आफिसर, स्टोर कीपर के पद को सहायक एवं कोर्स को-आर्डिनेटर एवं प्लेसमेंट आफिसर के पदों को सहायक कुलसचिव के पद पर परिवर्तित कर रेशनलाइजेशन की ओर से अत्यधिक लाभ दिया है, जो कि कर्मियों को नहीं दिया जा सकता है। कहा कि महापात्रा कमेटी ने लिपिकीय संवर्ग का रेशनलाइजेशन अन्याय की प्रकाष्ठा से किया है। इसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। इसके अलावा रेशनलाइजेशन कमेटी ने राज्य सरकार के जारी शासनादेश की ओर से स्थाई किए गए कई पदों को समाप्त कर दिया है, जबकि गढ़वाल विश्वविद्यालय में 184 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी कार्यरत थे। रेशनलाइजेशन कमेटी द्वारा एमटीएस के समाप्त किए गए पदों पर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी या मृतक आश्रितों को समायोजित किया जा सकता था। सिलवाल ने केद्रीय शिक्षामंत्री से कर्मचारियों के हित में रेशनलाइजेशन रिव्यू कमेटी पुनः गठित कर सही निर्णय लिए जाने की मांग की है।