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60 पेड़ों की अनुमति की आड़ में 116 बेशकीमती पेड़ों पर चला दी आरी

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कोटद्वार। यमकेश्वर ब्लाक के ग्राम दयावाला (बणास तल्ला) में 60 पेड़ों के कटान की इजाजत लेकर 115 खैर और एक शीशम के पेड़ पर आरी चला दी गई। लैंसडौन वन प्रभाग ने मामले में कार्रवाई कर अवैध कटान में उपयोग होने वाले दो ट्रक और ट्रैक्टर ट्राली और करीब 20 लाख रुपये लागत की 20 घनमीटर अवैध खैर की लकड़ी को सीज कर दिया है। पेड़ काटने की इजाजत लेने वाले दो ग्रामीणों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। डीएफओ ने नापखेत में अब तक दी गई पेड़ों के कटान की अनुमति को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।
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लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ वैभव सिंह ने बताया कि वन प्रभाग के लालढांग रेंज के अंतर्गत यमकेश्वर ब्लाक के ग्राम दयावाला (बणास तल्ला) के आनंद सिंह पुत्र बुद्धि सिंह और अवतार सिंह पुत्र उमराव सिंह को अपनी नापखेत की भूमि में 25 मई, 2018 को 30-30 हरे खैर के पेड़ों को काटने की अनुमति प्रदान की गई थी। एक जुुलाई को मुखबिर की सूचना पर अनुमति से अधिक पेड़ काटने का मामला प्रकाश में आया। इसके तुरंत बाद लालढांग और कौड़िया बैरियरों पर लकड़ी ले जाने वाले वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। कौड़िया चेकपोस्ट पर दो ट्रक पकड़े गए, जिनमें से एक ट्रक में 127 नग के रवन्ने पर 291 नग और दूसरे ट्रक में 155 की जगह 285 नग लोड किए हुए थे। दोनों वाहनों और लकड़ी को सीज कर दिया गया है। इसके बाद वन अधिकारियों की टीम को गांव भेजा गया, जहां 60 पेड़ों की इजाजत पर 116 पेड़ों के काटने की पुष्टि हुई है। पेड़ों को जड़ समेत उखाड़कर उसे मिट्टी से ढक दिया गया है। मौके पर एक ट्रैक्टर-ट्राली को जब्त कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि एक ट्रक लकड़ी पहले ही निकाल चुकी है, उसका पता लगाया जा रहा है।
डीएफओ ने कहा कि इस गांव में वर्ष 1994 में भूमि संरक्षण वन प्रभाग की ताल रेंज द्वारा पौधरोपण किया गया था। दोनों आरोपियों आनंद सिंह पुत्र बुद्धि सिंह और अवतार सिंह पुत्र उमराव सिंह के खिलाफ खिलाफ वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 और उत्तराखंड इमारती लकड़ी एवं अन्य वन उपज का अभिवहन नियमावली 2012 की धाराओं के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया है। साथ ही भारतीय वन अधिनियम के तहत वन अपराध में प्रयुक्त वाहन और वन उपज के अभिग्रहण की कार्रवाई की गई है। कहा कि मामले की विभागीय जांच के लिए अधिकारियों की टीम बनाई जाएगी। मामले में संलिप्त वन कर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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