कोटद्वार। लैंसडौन वन प्रभाग के अंतर्गत गुमखाल के पास रामागांव, जवाड़ और देवलखाल बनाड़ समेत अन्य गांवों में चीड़ के 283 हरे पेड़ों को काटने की अनुमति दिए जाने का मामला वन विभाग के शिवालिक वृत्त तक पहुंच गया है। इतनी बड़ी संख्या में एक साथ हरे पेड़ों के कटान की अनुमति दिए जाने की जानकारी लगते ही शिवालिक वृत्त की वन संरक्षक (सीएफ) मीनाक्षी जोशी ने लैंसडौन के डीएफओ संतराम से जवाब तलब किया है। आनन-फानन में डीएफओ ने पूर्व में दी गई अनुमति को निरस्त करते हुए मामले की जांच बिठा दी है। हालांकि अब तक तीन गांवों से 49 हरे पेड़ कट चुके हैं, जिन्हें वन विभाग निकासी भी दे चुका है। इस मामले में डीएफओ के साथ हुई बातचीत का वीडियो वायरल होने से राजनीतिक हलकों में घमासान मचा है।
लैंसडौन वन प्रभाग की ओर से गत नवंबर माह में ग्रामीणों और भूमि स्वामियों की ओर से मिले प्रार्थना पत्र के आधार पर 26 काश्तकारों को करीब 283 चीड़ के हरे पेड़ों के कटान की अनुमति दी गई है। ये सभी पेड़ काश्तकारों की नापखेत के हैं। इस मामले में हुई जनशिकायतों का शिवालिक वृत्त की वन संरक्षक मीनाक्षी जोशी ने संज्ञान लिया है। वन संरक्षक ने डीएफओ से मामले की रिपोर्ट तलब करते हुए तत्काल प्रभाव से कटान की अनुमति निरस्त करने के निर्देश दिए हैं। सीएफ के इस पत्र से लैंसडौन वन प्रभाग में हड़कंप मचा है।
डीएफओ संतराम ने बताया कि सीएफ के निर्देश पर पूर्व में दी गई अनुमति को निरस्त करते हुए जांच के आदेश दिए गए हैं। बताया कि तीन काश्तकारों को निकासी पत्र जारी किए जा चुके हैं। उनका कहना है कि ये सभी चीड़ के पेड़ निजी स्वामित्व के अप्रतिबंधित हैं, जिनके पातन की अनुमति वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 की धारा 6 (2) के तहत प्रदान की गई थी।
उधर, कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री राजेंद्र भंडारी और प्रदेश प्रवक्ता गिरिराज किशोर ने हरे पेड़ों के कटान पर सवाल उठाए हैं। डीएफओ के वायरल हुए वीडियो से भी सच्चाई उजागर हो रही है।