कोटद्वार। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में आरोपी को दोषसिद्ध पाते हुए एक वर्ष के कठोर कारावास और छह लाख साठ हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर आरोपी को छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भोगना पड़ेगा।
परिवादी के अधिवक्ता अरविंद वर्मा और प्रवेश रावत ने बताया कि नयागांव नजीबाबाद रोड निवासी राधेश्याम वर्मा पुत्र स्व. रामेश्वर प्रसाद वर्मा ने दो दिसंबर 2015 को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/सिविल जज (सीनियर डिवीजन) कोटद्वार के न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया था। प्रार्थनापत्र में कहा कि उसकी मो. नाजिम पुत्र नसीम अहमद निवासी लकड़ीपड़ाव से मित्रता थी। नजीम अक्सर अपना आवश्यक कार्य बताकर उससे धनराशि उधार ले जाता था। उन्होंने वर्ष 2013 से 2015 के बीच उसे करीब छह लाख 50 हजार रुपये की धनराशि उधार दी थी। आरोपी से धनराशि लौटाने का तकाजा करने पर उसने उन्हें आंध्रा बैंक शाखा कोटद्वार के अपने खाते का एक चेक 11 सितंबर, 2015 को इस आश्वासन के साथ दिया कि चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर उन्हें भुगतान प्राप्त हो जाएगा। उन्होंने अपने खाते वाले बैंक में चेक भुगतान के लिए प्रस्तुत किया, लेकिन 12 अक्तूबर, 2015 को चेक बाउंस हो गया। उन्होंने नजीम को भुगतान के लिए विधिक नोटिस अधिवक्ता के माध्यम से प्रेषित किया, लेकिन उसने भुगतान नहीं किया।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/सिविल जज (सीनियर डिवीजन) इंदु शर्मा की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावलियों पर उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी नजीम को दोषसिद्ध पाते हुए एक वर्ष के कठोर कारावास और छह लाख साठ हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर आरोपी को छह माह का अतिरिक्त कारावास भोगना पड़ेगा।