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किसानों के हित में कृषि विधेयक को वापस ले केंद्र सरकार

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सनेह क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों की बैठक में कृषि विधेयक को किसान विरोधी बताते हुए वापस लेने की मांग की गई। कहा कि जब तक कानून वापस नहीं लिया जाता विरोध जारी रहेगा।
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शुक्रवार को हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि भारत की आत्मा गांवों और खेती में बसती है। देश की पूरी अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर है। ऐसे में नए कानून लागू कर उसे कारपोरेट के नियंत्रण में रखने की सरकारी कोशिश किसानों की रीढ़ तोड़ देगी। कहा कि वर्तमान में कोरोना संक्रमण के चलते अर्थव्यवस्था पहले ही चौपट है। ऐसे में कृषि क्षेत्र को संभालने के बजाय नए कृषि कानून लागू कर केंद्र सरकार किसानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। मोदी सरकार अर्थव्यवस्था, रोजगार और किसानों के मोर्चे पर विफल साबित रही है। इस मौके पर राष्ट्रपति से मामले में हस्तक्षेप कर केंद्र सरकार को काले कानूनों को वापस लेने के लिए निर्देशित करने की मांग की गई। वरिष्ठ कांग्रेसी शंकेश्वर प्रसाद सेमवाल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सतीश मलासी, गंगा सिंह नेगी, प्रेम सिंह रावत, चंद्र मोहन सिंह, नत्थू सिंह अधिकारी, किशन सिंह अधिकारी, हयात सिंह मेहरा, धीरेंद्र सिंह नेगी, दिनेश चंद्र, कुंदन सिंह रावत, रमन सिंह रावत आदि मौजूद रहे।
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