श्रीनगर। प्रदेश में भांग की खेती के शासनादेश (जीओ) और डडुआ-भंडाली में शराब की फैक्टरी के विरोध में विभिन्न संगठनों ने प्रदेश सरकार का पुतला फूंका। संगठनों ने प्रदेश सरकार से दोनों शासनादेश वापस लेने की मांग की है। साथ ही ऐसा नहीं करने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
शनिवार को गोला पार्क में एकत्रित होकर विभिन्न संगठनों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शराब की फैक्टरी और भांग की खेती को मंजूरी देकर सरकार ने साबित कर दिया है कि यह नशे का व्यापार करने वाली सरकार है। उन्होंने कहा कि चुनाव आचार संहिता लागू होने से पूर्व सरकार ने नशे के कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए जीओ निर्गत करवाए हैं। कहा कि भांग के अलावा अन्य प्रजाति के पौधे भी हैं, जिनसे बेहतर रेशा उत्पादन हो सकता है। यह नशीले भी नहीं होते हैं। उन्होंने रोष जताया कि राज्य में विभिन्न स्थानों पर महिलाएं शराब के खिलाफ आंदोलन चला रही हैं और सरकार शराब के धंधे को बढ़ा रही है। यह महिलाओं की भावनाओं का मजाक उड़ाने के समान है। उन्होंने कहा कि पहाड़ में नशे के खिलाफ पहले से ही आंदोलन होते रहे हैं, लेकिन सरकार ने जन भावनाओं को दरकिनार किया है। जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों में हिमालय बचाओ आंदोलन के समीर रतूड़ी, प्रजा मंडल पार्टी की अध्यक्ष विमला नेगी, पर्वतीय विकास शोध केंद्र के नोडल अधिकारी डा. अरविंद दरमोड़ा, गंगा आरती समिति के अध्यक्ष प्रेम बल्लभ नैथानी, सुशीला देवी, हेमंती देवी और रामेश्वरी देवी आदि शामिल थे।