त्रिवेंद्र सरकार के आम बजट में कोटद्वार समेत प्रदेश के 35 बस अड्डों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 10 करोड़ रुपये की व्यवस्था को क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और संगठनों ने गैरजरूरी बताया। कहा कि कोटद्वार में बुनियादी सुविधाओं से पहले बस अड्डे के निर्माण की दरकार है। लोगों का कहना है कि जब कोटद्वार में बस अड्डा ही नहीं है तो ऐसे में बुनियादी सुविधाओं की बात करना ही बेमानी है।
गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार में जनप्रतिनिधियों और विभिन्न संगठनों की ओर से उत्तराखंड परिवहन निगम का बस अड्डा बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार में वर्षों से वर्कशॉप से संचालित बस अड्डे की ओर पहले ध्यान देने की जरूरत है। पूर्व सैनिक सेवा परिषद के अध्यक्ष गोपाल कृष्ण बड़थ्वाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष कैप्टन सीपी डोबरियाल, किशन सिंह, राजपाल सिंह, सौरभ नौटियाल, कुलदीप रावत, जगदीश मेहरा, राकेश बिष्ट, अमित नेगी ने कहा कि प्रदेश सरकार की बेरुखी झेल रहा कोटद्वार बस अड्डा वर्षों से वर्कशॉप में संचालित हो रहा है। कोटद्वार डिपो के बस अड्डे के निर्माण के लिए यहां खूनीबड़ में चयनित भूमि पर दस साल बाद भी कोई काम नहीं हुआ, जिससे कोटद्वार डिपो खस्ताहाल बना हुआ है।
हाल यह है कि स्टेशन रोड स्थित कार्यशाला और इसके बाहर सड़क से ही बसों का संचालन होता आ रहा है। वर्ष 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूड़ी के निर्देश पर बस अड्डे के लिए यहां खूनीबड़ में 0.265 हेक्टेयर भूमि चयनित की गई थी, लेकिन तब से कार्यशाला के निर्माण का मामला अधर में ही लटका रहा। वर्ष 2017 में कोटद्वार दौरे के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कार्यशाला और बस अड्डा निर्माण का वायदा किया था। दिसंबर, 2019 में अपने कोटद्वार भ्रमण के दौरान परिवहन मंत्री यशपाल आर्य भी बस अड्डे के निर्माण के लिए 50 लाख की धनराशि देने की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन इन घोषणाओं के धरातल पर उतरने का इंतजार हो रहा है।
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खूनीबड़ में स्वीकृत भूमि पर वर्कशॉप के निर्माण के लिए शासन को आठ करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है, जो शासनस्तर पर लंबित है। - टीकाराम आदित्य, एजीएम रोडवेज डिपो कोटद्वार।