कोटद्वार। पुराने हरिद्वार मार्ग पनियाली-डिग्री कालेज-मवाकोट कलालघाटी मार्ग पर मालन नदी में पूर्व में प्रस्तावित 300 मीटर स्पान का मोटर पुल बन गया होता तो वर्ष 2023 की आपदा के बाद भाबर के लोगों और सिडकुल के कारोबारियों को परेशानी नहीं उठानी पड़ती। इस पुल की जरूरत जुलाई, 2023 की आपदा में क्षतिग्रस्त हुए मोटाढाक और हल्दूखाता के बीच के मालन पुल के बाद महसूस हुई। लेकिन मालन पुल ढह हुए डेढ़ साल से ज्यादा समय हो गया है, कलालघाटी वाले पुल की अभी वन भूमि हस्तांतरण संबंधी बाधाएं भी अभी दूर नहीं हो सकी हैं। इसके बाद डीपीआर और अन्य स्वीकृतियां तो दूर की बात है।कोटद्वार पौड़ी हाईवे पर पनियाली से डिग्री कालेज होते हुए मवाकोट और मालन पार कलालघाटी उदयरामपुर नयाबाद के नाम से पुराने हरिद्वार मार्ग के करीब 8.1 किमी पर डेढ़ लेन सड़क बने आठ साल से अधिक का समय हो चुका है। यह सड़क डिग्री कालेज लालपुर, घराट होते हुए मवाकोट और इससे आगे कलालघाटी तक बन चुकी है।
इस मार्ग पर कई सालों से प्रस्तावित ग्वालगढ़ नदी में 30 मीटर व ध्रुवपुर में 90 मीटर स्पान के सुखरो पुल भी बन चुके हैं, लेकिन मवाकोट से कलालघाटी के बीच मालन नदी में प्रस्तावित 300 मीटर स्पान का पुल आकार नहीं ले सका है। पुल के निर्माण की बात उठने पर विभागीय अधिकारी डिजायन और डीपीआर भेजने की बात करते रहे। क्षेत्रवासी पुष्कर सिंह राणा, अशोक गौड़, दिनेश गौड़, चंद्रमोहन बिंजोला, अनुराग कंडवाल व जगदंबा प्रसाद उनियाल का कहना है कि यदि समय रहते यह पुल बना होता तो भाबर के मोटाढाक के पास वाले पुल के ढहने के बाद परेशान नहीं होना पड़ता।
.
.
मालन पुल ढहने के बाद आई कलालघाटी में प्रस्तावित पुल के निर्माण की याद
बीते 13 जुलाई, 2023 को कोटद्वार भाबर मार्ग पर मोटाढांक में मालन नदी के 325 मीटर स्पान का आरसीसी पुल के टूटने के बाद पुराने हरिद्वार मार्ग पर कलालघाटी और मवाकोट के बीच प्रस्तावित 300 मीटर स्पान के मालन पुल को बनाने की याद शासन, प्रशासन और लोनिवि को आई। क्षेत्रीय विधायक व विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने जब इस पुल का प्रस्ताव जल्द शासन को भेजने के निर्देश दिए। इसके बाद लोनिवि, राजस्व और वन विभाग की ओर से यहां संयुक्त निरीक्षण किया गया, तब पता चला कि इसके डबल लेन पुल निर्माण में वन भूमि हस्तांतरण का पेच फंस रहा है।
.
.
मालन पुल ढहने के बाद कलालघाटी के पास प्रस्तावित 300 मीटर स्पान पुल का संयुक्त निरीक्षण कराया गया था। डबल लेन पुल के निर्माण में वन भूमि का मसला सामने आया था। इसके लिए वन भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव तैयार किया जा चुका है। वन विभाग की ओर से मांगी गई आपत्तियों को निराकरण किया जा रहा है। इसके बाद पुल का डिजायन व संशोधित डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। पुल वेल फाउंडेशन तकनीकी पर बनाया जाएगा। इसमें करीब 35 करोड़ की लागत आएगी।
-निर्भय सिंह, अधिशासी अभियंता लोनिवि दुगड्डा।
20 साल बाद पहुंचा अपने गांव खूब हाइ वोल्टेज ड्रामा
20 साल बाद पहुंचा अपने गांव खूब हाइ वोल्टेज ड्रामा
20 साल बाद पहुंचा अपने गांव खूब हाइ वोल्टेज ड्रामा