जनपद के थलीसैंण ब्लॉक के चौथान पट्टी में बुद्ध पूर्णिमा की रात बिंदेश्वर मंदिर में 13 नवंबर को मेला लगेगा। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली चौथान विकास समिति और बिंदेश्वर मंदिर समिति की ओर से यह आयोजन किया जाएगा। समिति से जुड़े सुरेंद्र भंडारी ने बताया कि मेले की तैयारी शुरू कर दी गई हैं।
मान्यता है कि भगवान बिंदेश्वर न्याय और सत्य के साक्षी हैं। कभी इस वन में पांडवों ने निवास किया था। एक वर्ष के अज्ञातवास में पांडव यहां रहे थे। उन्होंने एक रात में इस मंदिर का निर्माण किया था। यहां की वसुधारा में स्नान के बाद पूजा की जाती है। इनकी संख्या पांच हैं। इनमें से दो जलधारे महिलाओं के लिए हैं। इसके पानी से बीणू नदी का उद्गम है। यह नदी रामगंगा में मिलती है।
बिंदेश्वर मंदिर को जाने के लिए पौड़ी-थलीसैंण-पीरसैंण से सीधा रास्ता है। रामनगर से बैजरों-बूंगीधार होकर आना होगा। कर्णप्रयाग व गैरसैंण से पैदल रास्ता है। रानीखेत से देघाट होकर बूंगीधार पहुंचा जा सकता है।
इसके आसपास नाथ बाबा की गुफा, ब्रह्मढुंगी, द्वारापालों, रिद्धिसिद्धि, छायाचौंरी, देवउडियार भी देखने योग्य हैं। चमोली, टिहरी में भी बिनसर के मंदिर हैं। रानीखेत के पास सौनी बिनसर में मोहन गिरि महाराज ने मंदिर को पहचान दिलाई, जबकि, अल्मोड़ा के पास भी चंद राजाओं ने 13वीं शताब्दी में बिनसर मंदिर बनवाया है।