गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार के बैंकों में नकदी का टोटा बना हुआ है। एटीएम में अब भी सुबह से देर शाम तक पैसे निकालने के लिए ग्राहकों की लंबी कतार लगी हुई है। कई बैंकों के एटीएम नोटबंदी के बाद से लगातार बंद चल रहे हैं, चंद राष्ट्रीयकृत बैंकों और प्राइवेट बैंकों के एटीएम दिन-रात लोगों को ढाई हजार रुपये उपलब्ध कराकर राहत पहुंचा रहे हैं।
कोटद्वार में एसबीआई, पीएनबी के बाद एचडीएफसी के एटीएम में सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ रही है। कई बैंकों के एटीएम कम पैसा होने के कारण सुबह चंद घंटों के बाद ही खाली हो जा रहे हैं। नंदपुर निवासी दयाराम भट्ट, मदन मोहन जोशी, आरएल कुकरेती और शिक्षक कल्याण सिंह नेगी कहते हैं कि एटीएम में कतार खत्म होने का नाम नहीं हो रहा है। शहर ही नहीं भाबर के दुर्गापुर और किशनपुर के बैंकों के आगे के एटीएम भी पैसा डालते ही खाली हो रहे हैं, जिससे परेशानी बढ़ती जा रही है।
नहीं मिल रहे दो हजार के नोट के छुट्टे, परेशानी
लैंसडौन। नोटबंदी के एक माह बाद भी लैंसडौन में जनता की समस्याएं कम नहीं हुई हैं। आज भी जनता को दो हजार रुपये के नोट के छुट्टे पाने के लिए यहां से वहां भटकना पड़ रहा है। व्यापारियों के पास भी ज्यादा छुट्टे न होने से वे ग्राहकों को सामान नहीं दे पा रहे हैं।
बैंकों से लोगों को दो हजार रुपये के नोट ही मिल रहे हैं और बाजार में छुट्टे पैसों की कमी होने से लोग दो हजार रुपये का नोट लेकर यहां से वहां भटक रहे हैं। छोटे नोटों की किल्लत से लोग जरूरी सामान तक नहीं खरीद पा रहे हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत भर्ती के लिए आए युवाओं को उठानी पड़ रही हैं।
एटीएम से दो हजार का नोट ही निकल रहा है और अनजान होने के कारण उन्हें कोई व्यापारी सामान उधार में भी नहीं दे रहा है। व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजेश ध्यानी ने बताया कि नोटबंदी के बाद से अभी तक बाजार प्रभावित है। व्यापारियों के पास छोटे नोट नहीं हैं। छोटे नोट न होने से व्यापारी व ग्राहक दोनों ही परेशान हैं।
वहीं दूसरी ओर उत्तरांचल ग्रामीण बैंक के प्रबंधक अनुराग धूलिया बताते हैं कि उनके बैंक में दो हजार के ही नोट आ पाए हैं, जिससे वे ग्राहकों को भी दो हजार के ही नोट दे रहे हैं। बैंक में अब तक एक सौ व पांच सौ के नोट नहीं आए हैं।