काशीपुर-बुआखाल हाईवे पर धुमाकोट से त्रिपालीसैंण के बीच करीब 83 किमी. हिस्से में एनएच प्रशासन की ओर से कराया गया डामरीकरण कार्य लोगों के लिए मुसीबत का सबब बना है। स्थिति यह है कि सर्दी में कार्य कराने से कई स्थानों पर डामर 15 दिन में ही उखड़ने लगा है और बजरी पर दोपहिया वाहन रपट रहे हैं। ग्रामीणों ने घटिया निर्माण पर नाराजगी जताई और मामले की जांच कराकर गुणवत्ता में सुधार की मांग की।
एनएच प्रशासन की ओर से काशीपुर-बुआखाल हाईवे पर 13.42 करोड़ की लागत से धुमाकोट से पॉलीटेक्निक बीरोंखाल तक 28 किमी. हिस्से पर डामरीकरण किया जा रहा है। वहीं 19.42 करोड़ की लागत से बीरोंखाल से तिरपालीसैंण तक 55 किमी. हिस्से का डामरीकरण कराया जा रहा है। वर्तमान में जिवई व मझगांव के बीच भी डामरीकरण कार्य चल रहा है लेकिन स्थिति यह है कि काम घटिया गुणवत्ता का होने के कारण डामरीकरण उखड़ने लगा है। सामाजिक कार्यकर्ता देशबंधु बिष्ट का कहना है कि कार्यदायी संस्था की ओर से धुमाकोट से मैठाणाघाट के बीच हाल ही में कराया गया डामरीकरण जगह-जगह उखड़ने लगा है। उधर, ग्रामीण मुकेश सिंह, अर्जुन सिंह, जयपाल सिंह, शांति देवी, देवेश्वरी देवी का कहना है कि कोठिला से सिरोली के बीच कराया गया डामर उखड़ने लगा है और उखड़ी बजरी पर दोपहिया वाहन रपट रहे हैं जिससे कई दोपहिया वाहन चालक चोटिल हो चुके हैं। उन्होंने घटिया गुणवत्ता के डामरीकरण की जांच कराकर इसके सुधारीकरण की मांग उठाई।
काशीपुर-बुुआखाल मार्ग पर कराए जा रहे डामरीकरण कार्य का निरीक्षण किया गया है। जांच के दौरान पाया गया कि नमी वाले स्थानों पर हुआ डामर उखड़ रहा है। ठेकेदार को नमी वाले स्थानों पर डामरीकरण उखाड़ कर पुन: डामरीकरण के निर्देश दिए गए हैं। - गिरधर टम्टा, सहायक अभियंता, एनएच खंड लोनिवि धुमाकोट।