अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश धनंजय चतुर्वेदी की अदालत ने लैंसडौन के दिखेत गांव के आरती दहेज हत्याकांड में पति को खुदकुशी के लिए उकसाने का दोषी पाते हुए उसे सात साल की सश्रम कैद और ढाई हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। दहेज उत्पीड़न में पति को तीन वर्ष की कैद और ढाई हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
इसी मामले में कोर्ट ने सास और ससुर को उनकी उम्र को देखते हुए तीन-तीन साल की कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने पूर्व में जेल में बिताई गई सजा भी इसमें समायोजित करने के आदेश दिए हैं। शासकीय अधिवक्ता नसीम बेग के अनुसार मृतका आरती देवी के पिता रामचंद्र सिंह की ओर से राजस्व पुलिस को दी तहरीर में बेटी के पति कमलकांत, सास शांति देवी और ससुर वीर सिंह के साथ ही अन्य परिजनों पर शादी के बाद से ही दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया।
आरती की शादी दो जून, 2013 को हुई थी, जबकि दस महीने बाद ही 30 अप्रैल, 2014 को उसने ससुराल में पंखे से लटककर जान दे दी थी। आरोप था कि मृतका का पति कमलकांत पुलिस में होने के कारण उनकी बेटी को दहेज के लिए परेशान करता था। मृत्यु से एक दिन पूर्व भी ससुराल में आरती के साथ मारपीट की गई थी, जिस पर आरती ने उसे ले जाने की बात कही थी।
राजस्व पुलिस ने मामले की विवेचना कर न्यायालय में पति, सास और ससुर के खिलाफ आरती को खुदकुशी के लिए उकसाने और दहेज उत्पीड़न में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। आरोपियों ने उन पर लगाए गए आरोपों से इनकार करते हुए विचारण की याचना की। दोनों पक्षों की दलीलें और पत्रावलियों पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर एडीजे कोर्ट ने आरोपियों को सजा सुनाई।