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अंकिता हत्याकांड: डीएम, एसडीएम और विधायक को समन भेजने के प्रार्थनापत्र को अदालत ने किया खारिज

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कोटद्वार। अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (एडीजे कोर्ट) ने शुक्रवार को बचाव पक्ष के उस प्रार्थनापत्र को खारिज कर दिया, जिसमें तत्कालीन डीएम, एसडीएम व विधायक को साक्ष्य के रूप में अदालत में बुलाने के लिए समन भेजने के लिए प्रार्थना की गई थी। अभियोजन पक्ष की ओर से इसमें आपत्ति दाखिल की गई थी। दोनाें पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने उक्त निर्णय दिया। अब अगली तिथि 21 फरवरी निर्धारित की गई है।
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उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता हत्याकांड की एसआईटी जांच के बाद कोटद्वार स्थित एडीजे कोर्ट में ट्रायल चल रहा है। इस मामले में अदालत में बचाव साक्ष्य की गवाही चल रही हैं। पिछली तिथि तक बचाव पक्ष के दो गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद अभियोजन पक्ष की ओर से जिरह पूरी की गई। 10 फरवरी की तिथि पर बचाव पक्ष की ओर से इस मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी, एसडीएम यमकेश्वर व विधायक (नाम से) को अदालत में बुलाने के लिए समन भेजने का आग्रह अदालत से किया गया था।
बचाव पक्ष के उक्त प्रार्थनापत्र पर शुक्रवार को अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अवनीश नेगी एवं अभियोजन अधिकारी राजीव डोभाल ने कई तर्क देते हुए आपत्ति दर्ज की। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने बचाव पक्ष के प्रार्थनापत्र को खारिज कर दिया। अदालत ने बचाव पक्ष के उस प्रार्थनापत्र को भी खारिज कर दिया, जिसमें मुख्य आरोपी पुलकित आर्य की ओर से उसके मोबाइल फोन की 10 एवं 11 सितंबर, 2022 की आईपीडीआर संबंधित अधिकारी से अदालत में उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। इसमें विवेचक की ओर से कहा गया कि किसी भी मोबाइल का सीडीआर व आईडीपीआर दो वर्ष के पश्चात प्राप्त नहीं की जा सकती है। अदालत ने अब इस मामले में अन्य बचाव साक्ष्य की सुनवाई के लिए 21 फरवरी की तिथि निर्धारित की है।
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