20-25 रुपये में भरपेट भोजन देने के उद्देश्य से महत्वाकांक्षी योजना इंदिरा अम्मा भोजनालय को प्रदेश सरकार ने जोर-शोर के साथ शुरू तो किया, लेकिन वक्त गुजरने के साथ सरकार इसे भूल गई है। यही कारण है कि कोटद्वार में उक्त योजना के तहत खुला भोजनालय बंदी के कगार पर है।
यहां भोजनालय को एक साल होने वाला है और अभी तक महिला स्वयं सहायता समूह के खातों में सब्सिडी का पैसा तक नहीं आया है। जैसे-तैसे महिलाएं अपने घर के खर्च से इस भोजनालय को चला रही हैं। 15 अगस्त 2015 को उत्तराखंड सरकार ने इंदिरा अम्मा भोजनालय की शुरुआत देहरादून से की थी।
यह भोजनालय देश की पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी को समर्पित है। उनकी जयंती 19 नवंबर 2015 से सरकार ने इस योजना का विस्तार करते हुए राज्य के प्रत्येक जिले में भोजनालय खोलने का निर्णय लिया। इसी के तहत कोटद्वार तहसील में भी 27 नवंबर 2015 को इंदिरा अम्मा भोजनालय की शुरुआत हुई।
महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा इस भोजनालय को संचालित किया जा रहा है। योजना के तहत 20 से 25 रुपये में कोई भी व्यक्ति भोजनालय में भरपेट खाना खा सकता है। कोटद्वार में योजना के तहत कैंटीन संचालित करने वाली स्वयं सहायता समूह की सदस्य सरोज बहुखंडी, शिखा ग्वाड़ी व नीलम आदि का कहना है कि वे 25 रुपये में लोगों को भरपेट खाना खिला रही हैं।
सरकार ने उन्हें कैंटीन तो दे दी है, लेकिन उसके बाद मुड़कर नहीं देखा। अभी तक उनके खातों में सब्सिडी का पैसा भी नहीं आया है, जिससे उन्हें अपने घर के खर्च से भोजनालय चलाना पड़ रहा है।