राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद चिलरखाल-लालढांग मार्ग के निर्माण ने जोर पकड़ लिया है। मोटर मार्ग का निर्माण वन विभाग की गाइड लाइन के अनुसार किया जा रहा है, जिसमें मेहली स्रोत और चमरिया स्रोत के बीच 750 मीटर का पैच वन्यजीवों की आवाजाही के लिए कच्चा ही रहेगा। मानसून सत्र में भी इस मार्ग पर आवाजाही बनाए रखने के लिए सिगड्डी स्रोत और मेहली स्रोत में बाक्स स्कपर बनाएं जाएंगे।
गढ़वाल-कुमाऊं को राज्य की सीमा के भीतर से जोड़ने वाली कंडी रोड के मुख्य भाग लालढांग-चिलरखाल वन मोटर मार्ग का निर्माण अब धरातल पर नजर आएगा। राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की ओर से सड़क निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने से मार्ग के निर्माण कार्य ने गति पकड़ ली है। वन विभाग की ओर से सड़क निर्माण के लिए लोनिवि दुगड्डा को कार्यदायी एजेंसी बनाया गया है। कार्यदायी एजेंसी वन विभाग की गाइडलाइन के अनुसार सड़क का निर्माण करने में जुट गई है। सड़क के निर्माण के लिए बीते 31 मार्च को राज्य सरकार 6.13 करोड़ रुपये स्वीकृत करते हुए शासनादेश जारी कर चुकी है।