कोटद्वार कोतवाली में दबोचे गए किडनी रैकेट के सरगना के साथ पुलिस टीम।
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किडनी ट्रांसप्लांट के नाम पर ठगी के मामले में पीड़ित सुभाष फूल की बेटी समाहिता फूल ने एएसपी को पूरी व्यथा सुनाई। उन्होंने कहा कि आरोपी कई किश्तों में पूरा पैसा ले चुका था। ऐसे में उस पर विश्वास करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। उसे श्रीलंका के कोलंबो स्थित वेस्टर्न हास्पिटल से उनकी किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत का पता चला था।
समाहिता ने बताया कि उनके पिता सुभाष फूल 2015 से किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। उनकी दोनों किडनियों ने काम करना बंद कर दिया है और वह केवल डायलिसिस पर जीवित हैं। चिकित्सकों ने उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी तो उसने श्रीलंका के कोलंबो स्थित वेस्टर्न हास्पिटल से ई-मेल द्वारा संपर्क किया। उसी ई-मेल में उसने अपने मोबाइल नंबर का भी उल्लेख किया था। दिसंबर 2015 में आरोपी अमरीश प्रताप पुत्र कमल सिंह सिसोदिया ने हास्पिटल को लिखे गए ई-मेल का संदर्भ देते हुए फोन किया और बताया कि वह मृत व्यक्तियों के अंग का प्रत्यार्पण विधिक तरीके से करता हैं। फरवरी 2016 में वह कोटद्वार आया और उसने विश्वास दिलाया कि वह पूर्व में भी कई लोगों के ट्रांसप्लांट करा चुका है। उसने इस कार्य में कुल खर्चा 50 लाख का बताया। परिवार ने पैसे का इंतजाम कर कई किश्तों में उसे दे दिए। बाद में उसने बताया कि उनके गुर्दे का ट्रांसप्लांट श्रीलंका में नहीं हो पाएगा। टर्की के कैंट अस्पताल में बात कर रखी है। कुछ समय बाद बताया कि टर्की में भी कुछ दिक्कत आ रही है। उसने चीन के एक अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट की बात कही। आरोपी अमरीश उसके पिता, मां और उसे चीन ले गया। चीन के अस्पताल में एक पाकिस्तानी डाक्टर उवैश की निगरानी में उनके कई प्रकार के टेस्ट करवाए गए। पहले ट्रांसप्लांट होने की तिथि बता दी, लेकिन बाद में ट्रांसप्लांट से एक दिन पूर्व ही उन्हें मेडिकली ट्रांसप्लांट के लिए अनफिट करार दे दिया गया। इसके बाद भी वह उन्हें आश्वस्त करता रहा कि वह पूरा प्रयास कर रहा है। फरवरी 2017 में आरोपी ने उन्हें बताया कि मिश्र में एक मृत व्यक्ति के गुर्दे का इंतजाम हो गया है, जिसके लिए मिस्र जाना होगा। आरोपी ने उनका वीजा बनाया और तीनों को मिश्र ले गया। सर्जरी से कुछ दिन पहले आरोपी ने उन्हें विश्वास दिलाने के लिए दानकर्ता से भी मिलवाया। मिश्र में एक माह व्यतीत होने के बाद भी जब किडनी ट्रांसप्लांट नहीं करवाई तो वे भारत लौट आए। बताया कि एक बार फिर विश्वास दिलाकर आरोपी उन्हें मिश्र ले गया, तब वह पूरे ढाई महीने तक वहां किडनी ट्रांसप्लांट का इंतजार करते रहे, लेकिन बैरंग लौटना पड़ा।