पति को आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने की आरोपी पत्नी को कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया। मामला पंजाब प्रांत के जालंधर शहर का है। कोटद्वार निवासी ससुर ने बेटे की रेल से कटकर हुई मौत के मामले में बहू पर उनके बेटे को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मुकदमा जालंधर में दर्ज कराया था। कोर्ट में तीन साल तक चली सुनवाई में एडीजे कोर्ट जालंधर ने बहू को दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष इस मामले को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता धनीष पोखरियाल ने बताया कि कोटद्वार की मानपुर निवासी शैलूजा पुत्री दीनदयाल सिंह का विवाह इसी गांव के संदीप पुत्र यशवंत सिंह से वर्ष 2012 में हुआ था। संदीप जालंधर में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था।
21 अक्तूबर 2013 को संदीप का शव जालंधर-नकोदर रेलवे पटरी पर मिला था। घटना के एक हफ्ते बाद संदीप के परिजनों की ओर से रेलवे पुलिस जालंधर में संदीप की पत्नी शैलूजा पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था।
जालंधर पुलिस ने इस मामले में विवेचना के बाद शैलूजा के खिलाफ जालंधर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की। बचाव पक्ष ने आरोपों से इनकार करते हुए परीक्षण की याचना की थी। करीब तीन वर्ष तक मामले में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध साक्ष्य को देखते हुए एडीजे कोर्ट जालंधर ने शैलूजा को दोषमुक्त कर दिया।