भक्तियाना के निवासियों ने श्रीनगर जल विद्युत परियोजना का संचालन कर रही एएचपीसीएल (अलकनंदा हाइड्रो पावर कंपनी) के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने पुलिस को पत्रावलियां उपलब्ध कराते हुए कहा कि एनजीटी (राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण) ने वर्ष 2013 की आपदा में भक्तियाना की तबाही के लिए परियोजना कंपनी को दोषी माना है। लिहाजा उस पर सुसंगत धाराओं में आपराधिक मामला भी दर्ज होना चाहिए।
सोमवार को श्रीनगर बांध आपदा संघर्ष समिति की अगुवाई में भक्तियाना क्षेत्र के महिला-पुरुष कोतवाली पहुंचे। मौके पर मौजूद एसआई संतोष पैथवाल से वार्ता करते हुए उन्होंने रोष व्यक्त किया कि वर्ष 2013 को अलकनंदा नदी में आई बाढ़ से भक्तियाना में रह रहे लोगों के घर में रेत और मलबा घुस गया था, जिससे कई परिवार बेघर हो गए। रेत और मलबा परियोजना कंपनी द्वारा नदी किनारे मलबा डंप किए जाने से घुसा। नवंबर 2013 में बाढ़ प्रभावितों ने कोतवाली में कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए तहरीर दी थी। तब पुलिस ने जांच की बात कही थी।
नगर पालिका सभासद विजय लक्ष्मी रतूड़ी ने कहा कि आज तक कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद बाढ़ प्रभावितों ने हक के लिए न्यायालय की शरण ली। हाल में एनजीटी ने कंपनी को नुकसान के लिए जिम्मेदार मानते हुए 9.26 करोड़ रुपये पर्यावरण राहत कोष प्राधिकरण में जमा करने के आदेश दिए हैं।
यह धनराशि भक्तियाना के 86 परिवारों को जिला प्रशासन के माध्यम से वितरित की जाएगी। उन्होंने कहा कि न्यायालय के फैसले के बाद पुलिस को कंपनी के विरुद्ध मामला दर्ज करना चाहिए। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष चंद्रमोहन भट्ट, प्रेमबल्लभ काला, इंदू उप्रेती, इंदू पोखरियाल, निर्मला, शकुंतला, दमयंती बिष्ट और सुनीता बिष्ट आदि उपस्थित थे। इधर, कोतवाल उत्तम सिंह ने कहा कि मामले को देखा जा रहा है।