लैंसडौन। कैंट सीईओ के साथ लोगों की जनसमस्याओं की सुनवाई और उनके निराकरण को लेकर कैंट कार्यालय में हुई वार्ता बेनतीजा रही। लोगों ने वार्ता के दौरान पुलिस बल की मौजूदगी पर आपत्ति जताई। वार्ता के लिए चार से अधिक लोगों को कैंट कार्यालय में जाने से रोकने पर नागरिक भड़क उठे। वे सीईओ पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए बाहर निकल गए।
पर्यटन नगरी लैंसडौन में व्याप्त जनसमस्याओं की सुनवाई न होने के खिलाफ लोगों की ओर से कैंट कार्यालय के समक्ष 22 नवंबर को बुद्धि-शुद्धि यज्ञ करने की सूचना देते हुए इसके लिए अनुमति मांगी गई थी। इसके जवाब में कैंट बोर्ड की सीईओ अंकिता सिंह ने ज्ञापन में हस्ताक्षर करने वालों को वार्ता का बुलावा भेजा। मंगलवार को जब लोग अपनी बातों को रखने के लिए कार्यालय गए तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने उनको एक साथ जाने से रोक दिया। इसके लिए उन्हें चार-चार लोगों का समूह बनाकर जाना पड़ेगा, जिससे मौके पर कैंट कर्मियों की लोगों के साथ बहस भी हुई। बाद में लोग चार-चार के समूह में अपनी बातों को रखने के लिए अंदर गए, जहां पुलिस फोर्स की मौजूदगी पर उन्होंने एतराज जताया। प्रतिनिधिमंडल में शामिल डा. एसवी नैथानी, आलोक नैथानी, संजय कन्नौजिया व राजीव शर्मा ने सीईओ को पूर्व में दिए गए शिकायती पत्रों का अब तक समाधान न होने की बात कही। वे सीईओ पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए बाहर निकल आए। उन्होंने बताया कि सीईओ ने उन्हें हर काम में रोड़ा अटकाने वाला बताया, जिस पर एतराज जताते हुए वे बाहर आ गए। वे शहर की समस्याओं से संबंधित 22 सूत्री मांगपत्र वार्ता चाहते थे, लेकिन बातचीत नहीं हो सकी।
इसके बाद वार्ता के लिए गए महिलाओं के प्रतिनिधिमंडल में शामिल पूर्व उपाध्यक्ष ऊषा नैथानी, लता खंडेलवाल, उर्मिला वर्मा, गुलनाज ने सीईओ का ध्यान शौचालयों, यूरीनल और सफाई अव्यवस्था की ओर आकृष्ट कराते हुए निराकरण की मांग की। महिलाओं ने कहा कि नगर में पौने दो साल में एक भी विकास कार्य नहीं हो पाया है। सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है, लेकिन संबंधित अधिकारी इस ओर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। सीईओ ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त दिया कि वह नगर की समस्याओं को लेकर प्रतिबद्ध हैं और जल्द ही समस्याओं का हल निकालेंगी।
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