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मंदाल घाटी के दो विद्यालय भूधंसाव की जद में, खतरा

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दुगड्डा। विकासखंड रिखणीखाल की मंदाल घाटी में रथुवाढाब-बसड़ा मार्ग के निकट स्थित दो राजकीय विद्यालय भूधंसाव की जद में है। विगत सात सालों से नदी से हो रहे लगातार भूकटाव से निजात दिलाने की शासन-प्रशासन की ओर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। जिससे विद्यालयों में शिक्षा ले रहे 126 बच्चे खतरे की जद में विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं।
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विधानसभा लैंसडौन के रथुवाढ़ाब के निकट स्थित राजकीय हाईस्कूल और राजकीय प्राथमिक विद्यालय कुमाल्ड़ी क्षेत्र के प्रमुख विद्यालय हैं। जिसमें झर्त, धामधार, रथुवाढ़ाब और कुमाल्ड़ी आदि गांवों के करीब 126 नौनिहाल शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
वर्ष 2010 में पर्वतीय क्षेत्रों में हुई अतिवृष्टि से मंदाल नदी के उफान से विद्यालय भूधंसाव की जद में आ गए थे। तब से प्रतिवर्ष मंदाल नदी विद्यालय को खतरे के करीब ला रही है, लेकिन स्थानीय जनता के कई बार शिकायत करने के बाद भी सिंचाई विभाग विद्यालयों के भू कटाव को रोकने के लिए पुख्ता कदम नहीं उठा रहा है।
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पूर्व ब्लाक प्रमुख रिखणीखाल सुरेंद्र सिंह नेगी, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य राम रतन नेगी, राजकीय प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सुधा बड़ोनी, शशि प्रभा ने सिंचाई विभाग पर विद्यालय के बच्चों के जीवन को खतरे में डालने का आरोप लगाया। कह कि पिछले सात वर्षों से विद्यालयों की भूमि नदी में समा रही है, जिसके कारण विद्यालय भवन क्षतिग्रस्त होने के कगार पर है। निकट भविष्य में अधिक प्रभावित होने की संभावना है। तब से कई बार शिक्षा विभाग के माध्यम से, जनता दरबार और तहसील दिवसों में विद्यालयों के खतरे की शिकायत कर रहे हैं, लेकिन विभाग खतरे से अनजान बना हुआ है।
उधर, सिंचाई विभाग दुगड्डा के सहायक अभियंता विक्रम सिंह रावत ने बताया कि उन्हें विद्यालयों के भूधंसाव की जानकारी नहीं हैै। विद्यालय की ओर से प्रस्ताव मिलने पर प्रभावित क्षेत्र के उपचार के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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