कोटद्वार। दुगड्डा ब्लॉक के खोह नदी के तटीय क्षेत्र में स्थित ग्राम पंचायत सरूड़ा सकाली के मकान खतरे की जद में है। सिंचाई विभाग की लापरवाही के चलते अभी तक बाढ़ सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं होने से आने वाली बरसात में भी तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
ग्राम पंचायत सरूडा सकाली के ग्रामीणों के खोह नदी के तटीय क्षेत्र में स्थित भवन खतरे की जद में है। बरसात में लंगूरगाड़ व सिलगाड़ के संगम से निकलने वाली खोह नदी के उफान में होने से क्षेत्र जलमग्न हो जाता है। दुगड्डा में 1917 व 1934 में दो बार बाढ़ आने से धनीराम बाजार व तटवर्ती क्षेत्र नदी में समा गए थे। वर्ष 2014 में भी अतिवृष्टि होने पर नदी के तीव्र प्रवाह से क्षेत्र जलमग्न होने से लोगों को प्रशासन ने घर से निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया था। प्रधान सावित्री देवी, कुलदीप सिंह, दिगंबर सिंह ने कहा कि नदी के किनारे शासन प्रशासन को ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए आवश्यक प्रबंध करने चाहिए, जिससे भविष्य में जान माल की क्षति से क्षेत्र को बचाया जा सके। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुधीर मोहन ने कहा कि सरूड़ा सकाली के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का पूर्व में प्राक्कलन तैयार कर शासन को भेजा गया था, लेकिन तब वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल पाई। अधीनस्थ अधिकारी से निरीक्षण करा प्राक्कलन तैयार कर दोबारा शासन को भेजा जाएगा।