कोटद्वार। श्री रामलीला कमेटी कुंभीचौड़ की ओर से आयोजित रामलीला के आठवें दिन लंका में हनुमान का प्रवेश, सीता से मिलना, अशोक वाटिका को तहस-नहस करना, रावण की सोने की लंका में आग लगाना आदि का मंचन किया गया। रामलीला के मंचन में हनुमान-रावण के बीच का संवाद आकर्षण का केंद्र रहा।
सोमवार को कुंभीचौड़ में आयोजित आठवें दिन की रामलीला का उद्घाटन धीरेंद्र चौहान और उनकी पत्नी विभा चौहान व पदमेंद्र असवाल ने संयुक्त रूप से किया। रामलीला के मंचन में सर्वप्रथम हनुमान का लंका में प्रवेश करना दिखाया जाता है। उसके बाद वह श्रीराम की अंगूठी सीता को देते हैं। सीता हनुमान पर विश्वास करती हैं। इसके बाद हनुमान भूख लगने पर अशोक वाटिका में फल खाने निकलते हैं और अशोक वाटिका को तहस नहस कर देते हैं। यह सुनकर मेघनाद वहां पहुंच कर हनुमान को बंधक बनाकर रावण के दरबार में ले आते हैं। रावण और हनुमान के बीच संवाद होता है। हनुमान रावण से सीता को वापस राम के पास भेजने की बात कहते हैं। इस बात पर रावण क्रोधित होकर सैनिकों को हनुमान की पूंछ में आग लगाने का आदेश देता है। हनुमान की पूंछ में आग लगते ही वह पूरी लंका में आग लगा देते हैं।
इस अवसर पर कमेटी के अध्यक्ष जगमोहन रावत, सचिव अरुण बहुगुणा, दीपक पांडे, कृष्ण कोटनाला, शमशेर राणा, मनीष रावत, मुकेश बहुगुणा, गणेश रावत, रमेश रावत, सुनील रावत, प्रदीप गौड़, मनोज जखमोला, डबल सिंह व दीवान सिंह रावत मौजूद रहे।
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राम-लक्ष्मण ने किया ताड़का का वध
सांस्कतिक समिति बीईएल की ओर से त्रिदिवसीय रामलीला का शुुुुभारंभ
अमर उजाला ब्यूरो
कोटद्वार। सांस्कृतिक समिति बीईएल की ओर से बीईएल में त्रिदिवसीय रामलीला का शुभारंभ किया गया। इसमें राम जन्म, ताड़का वध, मारीच सुबाहू दरबार और अहिल्या उद्धार का मंचन किया गया।
सोमवार को बीईएल में आयोजित रामलीला का शुुुुभारंभ बीईएल के महाप्रबंधक मनोज कुमार, संगठन के अध्यक्ष अनिल नवानी, समिति के अध्यक्ष रविकांत घिल्डियाल ने किया। रामलीला का मंचन ओंमकारेश्वर रामलीला कमेटी कलालघाटी के कलाकारों ने किया। प्रथम दिन की लीला में राम जन्म व मुनि द्वारा राम, लक्ष्मण, भरत एवं शत्रुघ्न को शिक्षा दीक्षा देना दिखाया गया। जंगल में ऋषि मुनियों को राक्षसों द्वारा परेशान करने पर मुनि विश्वामित्र राजा दशरथ से राम-लक्ष्मण मांगकर अपने साथ ले जाने और वनों में सुबाहु, ताड़का वध व धनुष यज्ञ का मनमोहक दृश्य किया गया। रावण-वाणासुर संवाद और परशुराम-लक्ष्मण संवाद आकर्षण के केंद्र बने।
इस दौरान समिति की संयोजक कैमिला थंगल, सतेंद्र सिंह बिष्ट, मदन असवाल, प्रदीप बडोला, राजशेखर, गुडवीर चंद्र इत्यादि लोग मौजूद थे।
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