कोटद्वार। भाबर के कई गांवों में सिंचाई का पानी देने वाली दाई मालन और इससे जुड़ी ब्रांच नहरों में लंबे अरसे से मलबे की सफाई न होने से किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। इसका असर धान की फसल पर पड़ रहा है। काश्तकार मालन फीडर की ब्रांच नहरों की सफाई करने की मांग कर रहे हैं ताकि काश्तकारों पर धान की फसल के लिए पर्याप्त पानी मिल सके।
दाई मालन नहर से लछमपुर न्याय पंचायत (हल्दूखाता पटवारी सर्किल) के करीब दो दर्जन गांवों में सिंचाई व्यवस्था चल रही है, लेकिन विभागीय उपेक्षा के कारण सिंचाई नहरों की मरम्मत तो दूर, इनकी सफाई तक ठीक से नहीं हो सकी है। कलालघाटी तक तो ठीक पानी चल रहा है, लेकिन इससे आगे किशनपुर, तेलीबाड़ा, रामदयालपुर और सिगड्डी क्षेत्र की नहरें बदहाल पड़ी हैं। कलालघाटी से त्रिलोकपुर (ढोका) की ओर की मुख्य नहर नदी से पानी के साथ आने वाले रेत व बजरी से अटी पड़ी है। काश्तकार जेपी बहुखंडी का कहना है कि हर साल सिंचाई विभाग इस नहर का मलबा हटाकर धान की फसल के लिए पर्याप्त पानी देता था, लेकिन इस बार नहर की सफाई तक नहीं हुई। अखिल भारतीय किसान सभा भाबर के संरक्षक ज्ञान सिंह नेगी, कुंवर सिंह, नंदकिशोर व राजेंद्र प्रसाद ने सिंचाई विभाग से अविलंब सिंचाई नहरों की सफाई करवाने की मांग की है।
जयदेवपुर की ग्राम प्रधान विमला देवी, ग्रामीण कुबेर सिंह जलाल, राजेंद्र सिंह व हरि सिंह का कहना है कि एक समय पूरे सिगड्डी इलाके को सिगड्डी नहर से सिंचाई का पर्याप्त पानी मिलता था। नलकूप बनने के बाद से सिंचाई विभाग ने इन नहरों की सुध लेनी छोड़ दी है। आलम यह है कि ये नहरें मलबे और झाड़ियों से पटी पड़ी हैं। सफाई के नाम पर झाड़ी घास काटकर खानापूर्ति हो रही है।
इस तरह की समस्या संज्ञान में नहीं थी। जेई को नहरों की सफाई करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी की आपूर्ति की जा सके।
-सीपी भट्ट, सहायक अभियंता सिंचाई खंड दुगड्डा।