सात साल पूर्व स्वीकृत एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) उत्तराखंड के स्थायी परिसर निर्माण की राह आसान नहीं है। परिसर का निर्माण सुमाड़ी और आसपास के इलाकों में होना है।
यहां तीव्र ढलान में निर्माण कराने से पहले संस्थान को लगभग 45 लाख क्यूबिक मिट्टी हटानी होगी, इस पर 650 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा। जबकि रिटेनिंग वॉल और 26 किलोमीटर लंबी आंतरिक सड़क के निर्माण पर 350 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
सुमाड़ी में तीन हजार छात्रों की क्षमतायुक्त एनआईटी परिसर के निर्माण में लगभग 1600 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे। देखना यह है कि क्या मिट्टी हटाने और दीवार निर्माण के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) 1100 करोड़ रुपये मंजूर करेगा। वर्ष 2009 में केंद्र सरकार ने 11 नए एनआईटी को मंजूरी दी, जिसमें उत्तराखंड को भी एनआईटी मिली।
यहां अभी एनआईटी आईटीआई और पालीटेक्निक के भवनों में संचालित हो रही है। इसके स्थायी परिसर का निर्माण श्रीनगर से लगभग 20 किलोमीटर दूर सुमाड़ी में होना है। इन दिनों सुमाड़ी में वृक्ष छपान का कार्य चल रहा है।
एनआईटी के निदेशक प्रो. एचटी थोराट ने बताया कि सुमाड़ी में लगभग 26 डिग्री का ढलान है। भवनों के निर्माण के लिए मिट्टी हटानी पड़ेगी। यह मिट्टी 10 किलोमीटर दूर डंप होगी। इसमें साढ़े छह सौ करोड़ रुपये खर्च होंगे। सीढ़ीनुमा पक्की जमीन पर निर्माण कार्य के कारण आंतरिक सड़कों की लंबाई बढ़ गई है। दीवार के ऊपर भवन नहीं बन सकेंगे, इसलिए काफी कम भूमि प्रयोग में आएगी।
एमएचआरडी के निर्देशों पर कमेटी गठित
एमएचआरडी ने एनआईटी स्वीकृत करते वक्त 300 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। सुमाड़ी मेें निर्माण कार्य के लिए एनबीसीसी (राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम) ने नक्शा तैयार किया है। मंत्रालय ने रिवाइज्ड इस्टीमेट तैयार करने के लिए एनआईटी, आईआईटी सहित अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों की कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। कमेटी रिवाइज्ड इस्टीमेट प्रस्तुत करेगी। ं