कोटद्वार। राज्य आंदोलनकारी और हाईकोर्ट के अधिवक्ता रमन शाह ने कहा कि उत्तराखंडियों के साथ 1994 में मुजफ्फरनगर में हुए जघन्य कांड में देर से ही सही, लेकिन न्याय अवश्य मिलेगा और दोषी नौकरशाहों के खिलाफ कानूनी लड़ाई न्याय मिलने तक जारी रखी जाएगी। बताया कि उनकी ओर से 18 मार्च 2018 को मुजफ्फरनगर कांड को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट में दायर याचिका से सीबीआई भी चक्कर काटने में जुटी है। कोर्ट ने राज्य सरकार और सीबीआई दोनों को जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट के अधिवक्ता रमन शाह ने पत्रकार वार्ता में कहा कि एक अक्तूबर 1994 को मुजफ्फरनगर कांड समेत मसूरी, खटीमा, कोटद्वार कांड में 28 लोगों की मौत हुई, जबकि 17 अभद्रता और 7 गैंगरेप के मामले सामने आए थे। मामले में कुल 660 शिकायतें दर्ज हुई और 68 केस दर्ज हुए। सभी मामलों में सीबीआई द्वारा चार्जशीट दाखिल की गई। मामले में सात मुकदमे मुजफ्फरनगर और पांच मुकदमे देहरादून में दर्ज हुए थे, जिनमें से 2003 में मुजफ्फरनगर के पांच मुकदमे और उत्तराखंड के चार मुकदमे लखनऊ, इलाहाबाद हाईकोर्ट और सीबीआई की अदालत में ट्रांसफर करा लिए गए, लेकिन चार्जशीट 10 मुकदमे में दाखिल की गई। कहा कि बाद में उत्तराखंड के अवशेष एक मुकदमे को भी बगैर हाईकोर्ट की अनुमति के इलाहाबाद ट्रांसफर किया जा रहा था, जिसके खिलाफ उनकी ओर से गत 18 मार्च 2018 को हाईकोर्ट में वाद दायर किया गया है। अधिवक्ता शाह ने बताया कि दो दिन पहले सीबीआई के अफसर इन्हीं मामले में उनके पास आए थे। कहा कि आंदोलनकारी एक बैनर के तले न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस मौके पर राज्य आंदोलनकारी महेंद्र सिंह रावत, धर्मदीप अग्रवाल, जसबीर राणा आदि मौजूद रहे।