जयहरीखाल/दुगड्डा। हिंदी के प्रथम डी. लिट्ट साहित्यकार डा. पीताबंर दत्त बड़थ्वाल की 117वीं जयंती पर हिंदी अकादमी उत्तराखंड की ओर से उनके पैतृक गांव पाली में गोष्ठी का आयोजन कर उनके योगदान पर चर्चा की गई। साहित्यकारों ने डा. बड़थ्वाल के हिंदी साहित्य को दिए गए योगदान को अतुलनीय बताया।
डा. पीतांबर दत्त बड़थ्वाल हिंदी अकादमी और डा. पीडी बड़थ्वाल जन्म-भू स्मारक समिति के तत्वावधान में बृहस्पतिवार को 117वीं जयंती पर डा. बड़थ्वाल को याद किया गया। लैंसडौन के विधायक दिलीप सिंह रावत की अध्यक्षता में आयोजित गोष्ठी में काशी के वरिष्ठ साहित्यकार डा. देवेंद्र कुमार सिंह और उत्तराखंड हिंदी अकादमी के सचिव बीआर टम्टा ने हिंदी साहित्य जगत में डा. बड़थ्वाल के योगदान को अतुलनीय बताया। डा. देवेंद्र ने कहा कि डा. बड़थ्वाल ने गोरखनाथ वंशावली पर विशद् लेखन कार्य किया है।
उन्होंने कहा कि कविवर सुमित्रानंदन पंत की तरह दशकों पूर्व डा. बड़थ्वाल साहित्य शोधपीठ की स्थापना की घोषणा आज तक फलीभूत नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि साहित्य के संरक्षण से सभ्यताओं के विकास का मार्ग प्रशस्त होता है, किंतु पाश्चात्य संस्कृति का प्रहार झेल रही आधुनिक भारतीय सभ्यता में भारतीय साहित्य और साहित्यकार हाशिए पर हैं।
विधायक दिलीप रावत ने पाली तल्ली को जयहरीखाल मुख्यालय से जोड़ने और डा. बड़थ्वाल का स्मारक बनाने की घोषणा की। कहा कि इससे क्षेत्र में साहित्य साधना कर चुके बाबा नागार्जुन, डा. भक्तदर्शन, डा. बड़थ्वाल जैसे मनीषियों से युवा पीढ़ी प्रेरणा ग्रहण कर सकेगी। हिंदी अकादमी की पूर्व निदेशक सविता मोहन ने गढ़वाली संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया। इस मौके पर हिंदी अकादमी की ओर से डा. बड़थ्वाल के परिजन सतीश चंद्र बड़थ्वाल, दीपा देवी, गणेश नौडियाल और उनकी नातिन नीलम ध्यानी को सम्मानित किया। अकादमी ने डा. गणेशमणी त्रिपाठी को वर्ष 2017 तथा जानकी प्रसाद धस्माना को वर्ष 2018 के लिए डा. पीतांबर दत्त सम्मान प्रदान किय। इस मौके पर अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष सुशील उपाध्याय, वि त्त अधिकारी भास्करानंद सेमवाल, प्रमोद बड़थ्वाल, सचिन बड़थ्वाल, आशीष बड़थ्वाल, डा. नंदकिशोर ढौंडियाल, डा. संजय कुमार, डा. आरके सिंह आदि मौजूद थे।
उधर, एमकेवीएन इंटरनेशनल स्कूल शिब्बूनगर में आयोजित गोष्ठी में डा. पीडी बड़थ्वाल के हिंदी साहित्य में दिए गए योगदान पर चर्चा की गई। गोष्ठी में प्रकाश कोठारी, मयंक कोठारी, शिवप्रसाद कुकरेती, डा. आरपी ध्यानी, डा. पीएल भट्ट आदि मौजूद थे।
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