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पाश्चात्य संस्कृति से पैदा हो रहे मानसिक विकार

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कोटद्वार। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने मानसिक विकारों को दूर करने के लिए सौहार्दपूर्ण माहौल बनाने और आपसी मेलजोल बढ़ाने पर जोर दिया। इस मौके पर मानसिक रोगियों की काउंसिलिंग करने का सुझाव दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि पाश्चात्य जीवन संस्कृति से मानसिक विकार पैदा हो रहे हैं, जिन्हें दूर करने के लिए अपनी संस्कृति और सभ्यता के अनुसार सहज जीवन प्रणाली अपनानी होगी।
कोटद्वार नगर निगम सभागार में प्रेस क्लब की ओर से आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में देश में चार में से एक महिला और दस में से एक पुरुष मानसिक रोग से ग्रस्त हैं। अधिकांश लोगों में तत्कालीन परिस्थितियों का मुकाबला करने की क्षमता न होने के कारण वे लोग मानसिक बीमारी का शिकार हो जाते हैं। उन्होंने मानसिक बीमारियों को ठीक करने के लिए योग, आपसी विचार-विमर्श सहित रोजमर्रा के कार्यों में अपने को व्यस्त रहने के सुझाव दिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुधींद्र नेगी और संचालन प्रफुल्ल पांथरी ने किया। इस मौके पर साहित्यकार योगेश पांथरी, पूर्व डीआई बलराम सिंह नेगी, नागेंद्र उनियाल और दिनेश चंद्र बलोधी आदि मौजूद थे।
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विधिक शिविर लगाया
लैंसडौन। तहसील विधिक सेवा समिति की ओर से तहसील में विधिक सेवा शिविर लगाया गया। शिविर में ‘नालसा योजना 2016’, बच्चों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएं और उनके संरक्षण के लिए विधिक सेवाओं की जानकारी दी गई। सिविल जज जूनियर डिविजन पुनीत कुमार ने कहा कि बच्चों को शोषण से बचाने के लिए विधिक सेवाओं की जानकारी जरूरी है। इसके लिए लोगों को जागरूक करना जरूरी है। शिविर में सहायक अभियोजन अधिकारी वीरेंद्र सिंह रावत, वीरेंद्र उनियाल, उपदेश खंडेलवाल, जयशंकर ढौंडियाल, विष्णु ध्यानी और कैलाश ढौंडियाल ने विचार रखे।
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