कोटद्वार। लैंसडौन वन प्रभाग क्षेत्र की बेशकीमती लकड़ी पर वन माफिया की नजर लग गई है। बुधवार को यमकेश्वर ब्लाक के तल्ला बणास क्षेत्र में 60 पेड़ों के कटान की आड़ में 116 हरे पेड़ काटे जाने की घटना के बाद वन विभाग चौकन्ना हो गया है। विभाग ने 266 पेड़ों के काटने की सभी स्वीकृत 25 आवेदनों को निरस्त कर दिया गया है। इसके अलावा सभी निकासी चौकियों में वन संपदा को ले जाने पर पाबंदी लगा दी गई है।
43327.60 हेक्टेयर वन भूमि में पांच रेंजों में फैले लैंसडौन वन प्रभाग के आरक्षित, सिविल और नाप खेत में खैर, शीशम, साल, सागौन और चंदन जैसी बेशकीमती पेड़ बहुतायत में हैं। उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा होने के कारण वन तस्करी को लेकर लैंसडौन वन प्रभाग अति संवेदनशील माना जाता है। वन माफिया ग्रामीणों के नाम पर पेड़ काटने की वन विभाग से इजाजत लेते हैं और ग्रामीणों को लालच देकर इजाजत से अधिक पेड़ काट देते हैं। वाहनों के रवन्ना से अधिक माल बाहर ले जाया जाता है।
यमकेश्वर के तल्ला बणास में अधिक मात्रा में पेड़ काटे जाने की घटना के बाद वन माफियाओं पर नकेल कसने के लिए लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ वैभव सिंह ने अप्रैल से जून माह तक के 266 पेड़ों के लिए कोटद्वार रेंज के छह, लैंसडौन रेंज के 10, लालढांग रेंज के छह और दुगड्डा रेंज के तीन पेड़ काटे जाने के आवेदनों को निरस्त कर दिया गया है।
क्या कहते हैं अधिकारी
वन प्रभाग के अंतर्गत नाप खेत में बड़ी मात्रा में पेड़ काटे जाने का मामला गंभीर है। वन संपदा को बचाने के लिए पेड़ काटने के सभी आवेदनों को निरस्त कर दिया गया है। भविष्य में भी पेड़ काटने की किसी को इजाजत नहीं दी जाएगी। इसके लिए वन कर्मियों को अलर्ट किया गया है और चौकियों पर लकड़ी ले जाने पर पाबंदी लगा दी गई है।
-वैभव सिंह, डीएफओ लैंसडौन वन प्रभाग
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