कोटद्वार। लैंसडौन वन प्रभाग के हाथी कॉरिडोर क्षेत्र के बीच से खतरे की जद में आठ किमी पैदल चलकर कोटद्वार पहुंचने वाले यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र के 13 गांवों के ग्रामीणों का सड़क का सपना सकार होने जा रहा है। 13 साल से घराट-मुंडला मोटर मार्ग के लिए संघर्ष कर रहे ग्रामीणों को हाथी कॉरिडोर होने के कारण पीडब्लूडी को सड़क बनाने की मंजूरी तो नहीं मिली, लेकिन अब वन विभाग इस मार्ग पर मोटर मार्ग बनाने जा रहा है। विभाग ने मार्ग के लिए सर्वे का काम शुरू कर दिया है।
वर्ष 2005 से सड़क से कटे इस क्षेत्र को पुन: सड़क से जोड़ने के लिए वन विभाग और लोक निर्माण विभाग ने संयुक्त सर्वे के बाद करीब एक करोड़ 40 लाख का बजट स्वीकृत किया था। ग्रामीणों ने सड़क बनाने के लिए वन विभाग को अपनी 10 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरित भी कर दी थी, लेकिन समय पर जनप्रतिनिधियों की ओर से पैरवी नहीं होने के कारण सड़क वन विभाग के नियमों में फंस गई। बाद में वन विभाग ने हाथी कॉरिडोर क्षेत्र होने के कारण सड़क की फाइल वापस लौटा दी थी।
सड़क नहीं होने से गांव में बेटी नहीं व्याहते थे लोग
क्षेत्र के मुंडला, बंस्तोली, काटल, कस्याली, भुनार, खाल, कटल, ढौलण्या, स्यालिंगा, गिठाला, मटियाल, पोखरी और अमूल गांव में सड़क नहीं होने के कारण कोटद्वार आने के लिए छह से आठ किमी जंगली रास्ता तय करना पड़ता था। इसके कारण क्षेत्र के गांवों में कोई भी अपनी बेटी का व्याह नहीं करता था। छात्र-छात्राएं 12वीं करने के बाद आगे की पढ़ाई नहीं कर पाते थे।
क्या कहते हैं अधिकारी
घराट-मुंडला वन मोटर मार्ग के लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ने सर्वे किया था। मार्ग को लेकर आला अधिकारियों के लिए रिपोर्ट भेजी जा रही है। स्वीकृति मिलने पर ही सड़क निर्माण किया जाएगा।
- एसपी कंडवाल, कोटद्वार रेंज अधिकारी लैंसडौन वन प्रभाग
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