यमकेश्वर। सिंचाई विभाग की लापरवाही के चलते यमकेश्वर ब्लाक की करीब 600 नाली उपजाऊ भूमि बंजर हो गई है। खेतों पर उगी झाड़ियां विभाग की कार्यप्रणाली की पोल खोल रही हैं।
वर्ष 1977-78 में सप्तरूद्रा नदी पर सीला नहर (सीला सप्लीमेंट्री सिंचाई नहर) का निर्माण किया गया था। इससे यमकेश्वर ब्लाक के माला, राजसेरा, ठांगर, पंचूर, ठिंगाबांज व मलेथा आदि ग्राम पंचायतों के किसानों की करीब 600 नाली खेती सिंचित होती थी। जिन खेतों में गेहूं और धान की फसल लहलहाती थी, उन पर सिंचाई नहीं होने से आज लेंटाना की झाड़ियां उगी हुई हैं।
ग्रामीण शांतनु बडोला, कांता प्रसाद, संतोष बडोला, सुभाष बड़ोला, सुरेश बडोला, रमेश बड़ोला, हेमंत बडोला, विनोद सिंह, दिनेश चंद्र व भारत सिंह ने विभाग पर क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाया। कहा कि सिंचाई नहर के संबंध में कई बार जनप्रतिनिधियों और सिंचाई विभाग से से बात की गई। छह जून को तहसील दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी पौड़ी के सामने भी ग्रामीणों ने सिंचाई नहर की शिकायत की। जिलाधिकारी पौड़ी ने सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता को क्षतिग्रस्त सिंचाई नहर की मरम्मत को लेकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे, लेकिन नहर पर अभी तक कोई काम नहीं हो पाया है। खेती चौपट होने के कारण लोग पलायन को मजबूर हैं।
उधर, सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता सुबोध मैठाणी ने बताया कि सिंचाई नहर के निर्माण के लिए नाबार्ड व आपदा आदि में प्रोजेक्ट भेजे गए थे, लेकिन विभाग को कहीं से इसके लिए बजट नहीं मिल पाया था। अब जिला योजना के माध्यम से सिंचाई नहर के निर्माण के लिए बजट स्वीकृत हो गया है। शीघ्र सिंचाई नहर पर कार्य शुरू किया जाएगा।
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