कोटद्वार। मालन नदी में खनन खुलने में नदी में बह रहा पानी का पेच फंस रहा है। एक बार फिर नदी में पानी की मात्रा अधिक होने के कारण भारतीय मृदा एवं जल प्रबंधन संस्थान (आईआईएसडब्लूसी) ने उपखनिज का सर्वे कुछ और दिनों के लिए टाल दिया है। उत्तराखंड वन विकास निगम के अधिकारियों की मानें तो हर मानसून सत्र के बाद संस्थान से उपखनिज का सर्वे कराना जरूरी है।
कोटद्वार क्षेत्र की प्रमुख मालन नदी में खनन खुलने में अभी दस दिन और लगने की संभावना है। दरअसल, मालन नदी में बह रहे पानी के कारण आईआईएसडब्लूसी इस मानसून के दौरान नदी में आए उपखनिज का सर्वे नहीं कर पा रहा है। इस कारण यह सर्वे कार्य कुछ और दिनों के लिए टाल दिया गया है। उत्तराखंड वन विकास निगम नदी में पानी घटने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। खनन कार्य के कुछ दिन और टलने से खनन कारोबारियों और इस व्यवसाय से जुड़े लोगों में मायूसी छा गई है। खनन नियमावली के अनुसार मानसून सत्र खत्म हुए दस दिन बीत चुके हैं, लेकिन इस बार मालन नदी में पानी कम न होने के कारण आईआईएसडब्लूसी देहरादून की सर्वे मशीनें नहीं लग पा रही हैं। वन विकास निगम के प्रभागीय विक्रय प्रबंधक राजेंद्र चौधरी का कहना है कि मानसून सत्र खत्म होने के बाद एक अक्तूबर को खनन खुलवाने के लिए जिले से लेकर प्रदेश स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की गाइड लाइन के अनुसार हर मानसून सत्र के बाद नदी में आई उपखनिज सामग्री का सर्वे भारतीय मृदा एवं जल प्रबंधन संस्थान देहरादून से कराया जाना आवश्यक होता है। सितंबर के अंत में हुई बारिश के चलते इस बार अक्तूबर में भी नदी में पानी है। इसी के चलते दो बार सर्वे कार्य टल चुका है। अधिकारियों की मानें तो अभी दस दिन और खनन खुलवाने की प्रक्रिया में लग सकते हैं। क्षेत्र में पूरे 13 साल बाद खनन के लिए खुली मालन नदी में मानसून के बाद फिर से खनन कार्य शुरू होने का क्षेत्रवासी और निर्माण के क्षेत्र में कार्य कर रही सरकारी, गैरसरकारी एजेंसियां बेसब्री से इंतजार कर रही हैं।