कोटद्वार। कई सालों तक वन भूमि हस्तांतरण में फंसी देवीखाल-जुगरसैंण-फतेहपुर मोटर मार्ग पर पेच पर पेच फंसते जा रहे हैं। हाल यह है कि 12 साल बाद भी सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। एलाइनमेंट विवाद सुलझने के बाद ग्रामीणों को जल्द सड़क का निर्माण शुरू होने की उम्मीद बनी थी, लेकिन अब सड़क का प्रस्ताव एक बार फिर से अधीक्षण अभियंता पौड़ी के कार्यालय में स्वीकृति के लिए अटका पड़ा है।
वर्ष 2006 में स्वीकृत 10 किमी इस सड़क के निर्माण के लिए कई सालों तक वन भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव लैंसडौन वन प्रभाग में अटका रहा। पहले ऑफलाइन और बाद में ऑनलाइन प्रस्ताव लोनिवि दुगड्डा की ओर से वन विभाग को भेजे गए, लेकिन 12 सितंबर, 2016 को वन विभाग ने उक्त प्रस्ताव निरस्त कर पुन: संशोधित प्रस्ताव भेजने को कहा। दस साल तक सड़क की पत्रावलियां वन विभाग में धूल फांकती रही। दो बार के प्रस्ताव को जब वन भूमि हस्तांतरण की अनुमति नहीं मिली तो ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के लिए अपनी नापखेत जमीन देने का प्रस्ताव लोक निर्माण विभाग दुगड्डा को दिया। इस प्रस्ताव पर भी एलाइनमेंट (संरेखण) विवाद खड़ा हो गया। जुगरसैंण की ग्राम प्रधान सुमित्रा देवी भदोला का कहना है कि इस साल गत 19 अप्रैल को लोनिवि के अधिकारियों के साथ एलाइनमेंट विवाद को सुलझा लिया गया, लेकिन अभी तक सड़क निर्माण का प्रस्ताव अधीक्षण अभियंता कार्यालय पौड़ी में स्वीकृति के लिए अटका हुआ बताया जा रहा है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीण कैलाश भदोला, विनोद भदोला, हरीश ध्यानी, सुनील ध्यानी, इंद्रमोहन बड़थ्वाल, शंभूप्रसाद जखमोला ने विभाग को चेतावनी दी है कि जल्द ही सड़क का निर्माण शुरू नहीं हुआ तो ग्रामीण लोनिवि दुगड्डा के कार्यालय पर तालाबंदी के साथ ही धरना-प्रदर्शन शुरू कर देंगे।
देवीखाल-जुगरसैंण-फतेहपुर 10 किमी मोटर मार्ग के निर्माण के लिए नए सिरे से प्रस्ताव बनाकर स्वीकृति के लिए अधीक्षण अभियंता पौड़ी को भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद वन विभाग और राजस्व विभाग के साथ संयुक्त निरीक्षण कर भूमि की स्थिति स्पष्ट की जाएगी। इसके बाद निविदा आमंत्रित की जाएगी।
-निर्भय सिंह, ईई लोनिवि दुगड्डा।
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