कोटद्वार। पौड़ी जिले की सबसे बड़ी और संवेदनशील कोटद्वार तहसील अधिकारी विहीन हो गई है। स्थानांतरण सूची जारी होने के बाद जहां एसडीएम अपने प्रतिस्थानी की प्रतीक्षा कर रहे हैैं, वहीं 13 दिन से तहसीलदार के दफ्तर में ताले लटके हुए हैं। करीब डेढ़ साल से तहसील में नायब तहसीलदार के दोनों पद खाली चल रहे हैं। इसका खामियाजा तहसील के लोगों को उठाना पड़ रहा है। जरूरी प्रमाणपत्र तक निर्गत नहीं होने से लोगों में शासन-प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। तहसीलदार और नायब तहसीलदार की कोर्ट ठप होने से भूमि संबंधी कार्य भी बाधित हो गए हैं।
तहसील में कोटद्वार भाबर सहित यमकेश्वर विधानसभा के घाड़ क्षेत्र के अलावा द्वारीखाल ब्लॉक के भी गांव पड़ते हैं। सरकार की उपेक्षा के चलते कोटद्वार तहसील में अधिकारियों का टोटा बना हुआ है। उपजिलाधिकारी राकेश चंद्र तिवारी का बागेश्वर स्थानांतरण हो चुका है। वे अपने प्रतिस्थानी की प्रतीक्षा करते हुए केवल रूटीन वर्क ही निपटा रहे हैं। तहसीलदार और नायब तहसीलदार का पद रिक्त होने के कारण कानूनगो थोड़ा बहुत काम कर रहे हैं, लेकिन भूमि संबंधी, आय, जाति व तहसील से जारी होने वाले अन्य प्रमाणपत्रों का काम पूरी तरह ठप हो गया है।
यहां तैनात रहे तहसीलदार छवाण सिंह रावत गत 31 मई को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके स्थान पर श्रीनगर तहसील से तहसीलदार सुनील राज का स्थानांतरण कोटद्वार किया गया है, लेकिन 13 दिन बाद भी उन्होंने यहां कार्यभार नहीं संभाला है। बताया जा रहा है कि पूर्व में कोटद्वार में काम कर चुके तहसीलदार सुनील राज कोटद्वार में बढ़ते राजनीतिक दखल, भूमि संबंधी विवाद, भूमि और खनन माफिया की बढ़ती गतिविधियों के चलते यहां नहीं आना चाहते। अधिकारियों की कमी का खामियाजा यहां के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। एसडीएम राकेश तिवारी का कहना है कि तहसीलदार और नायब तहसीलदार की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा गया है।