कोटद्वार। स्वैच्छिक रक्तदान के लिए बलवान होने की जरूरत नहीं पड़ती है। खून की एक बूंद किसी की सांसें वापस लौटा सकती है। कोद्वार के लोगों से बेहतर इसे कोई नहीं समझ सकता है। कोटद्वार के लोग स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति बेहद जागरूक हैं। ब्लड बैंक में ब्लड यूनिट का स्टॉक हमेशा फुल रहता है। रेयर ग्रुप के लिए बिजनौर, नजीबाबाद, हरिद्वार समेत आसपास के शहरों से लोग कोटद्वार ब्लड बैंक पहुंचते हैं।
कोटद्वार में राजकीय चिकित्सालय परिसर में ही ब्लड बैंक है। ब्लड बैंक में 100 यूनिट ब्लड सुरक्षित रखने की क्षमता है। कोटद्वार राजकीय अस्पताल पौड़ी जिले का सबसे बड़ा रेफरल सेंटर है। सड़क दुर्घटनाओं के घायलों को यहीं रेफर किया जाता है। गर्भवती महिलाएं भी आपरेशन के लिए कोटद्वार ही ेआती हैं। मरीजों के आपरेशन के लिए कोटद्वार अस्पताल में आसानी से ब्लड उपलब्ध हो जाता है।
ब्लड बैंक प्रभारी डा. अजय प्रताप बताते हैं, औसतन रोजाना 12 से 15 यूनिट ब्लड आपरेशन के मरीजों और सड़क दुर्घटना के घायलों के लिए जारी होता है। बैंक में ब्लड की कभी कमी नहीं होती है। आठ सामाजिक संगठन नियमित रूप से रक्तदान के लिए कैंप लगाते हैं। छात्र संगठन और स्थानीय जागरूक लोग भी स्वैच्छिक रक्तदान करने पहुंच जाते हैं। इसके चलते बैंक में ब्लड यूनिट का स्टॉक पर्याप्त रहता है।
लैब टेक्नीशियन केशर सिंह रावत बताते हैं कि रेयर ग्रुप वाले 40 रक्तदाता हैं। बड़े-बड़े शहरों में जहां कॉमन ग्रुप के ब्लड के लिए मारामारी रहती है कोटद्वार में रेयर ग्रुप भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहता है। कई बार तो रेयर ग्रुप की तलाश में नजीबाबाद, बिजनौर, हरिद्वार एवं आसपास से मरीजों के तीमारदार कोटद्वार ब्लड बैंक पहुंचते हैं।
कंपोनेंट यूनिट की जरूरत
ब्लड बैंक में कंपोनेंट मशीन नहीं लग पाई है। इसके चलते प्लाज्मा और प्लेटलेट्स की कमी से जूझना पड़ता है। डेंगू के मरीजों के लिए प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ती है। प्लेटलेट्स की कमी के चलते डेंगू मरीजों को देहरादून रेफर करना पड़ता है। कंपोनेंट यूनिट लगने से यह समस्या दूर हो जाएगी।