फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आयुष्मान योजना: केंद्र और प्रदेश सरकार पीट रही ढोल, नहीं मिल रहा लाभ

विज्ञापन
विज्ञापन
कोटद्वार। केंद्र और प्रदेश सरकार आयुष्मान भारत और अटल आयुष्मान स्वास्थ्य योजना का खूब ढोल पीट रही है, लेकिन इस योजना की धरातल पर हकीकत कुछ और ही है। लोगों को गोल्डन कार्ड का लाभ योजना के लांच होने के कई महीने बाद भी नहीं मिल रहा है। ऐसा ही एक मामला कोटद्वार के लकड़ीपड़ाव का सामने आया है। लकड़ीपड़ाव निवासी समीम की हालत बिगड़ने पर कोटद्वार अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा रेफर करने पर परिजन उसे जौलीग्रांट ले गए, लेकिन परिजनों के अनुसार उसे चिकित्सालय प्रशासन ने आयुष्मान योजना के तहत बने गोल्डन कार्ड का कोई लाभ नहीं दिया। मरीज को दिल्ली के पंत मेडिकल कालेज में भी कोई लाभ नहीं मिला। वह बाईपास सर्जरी के लिए भटक रहा है।
विज्ञापन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत 23 सितंबर को आयुष्मान भारत योजना का शुभारंभ किया। इसके जरिए देश के 10 करोड़ परिवारों को पांच लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस देने की बात कही गई। इस योजना से उत्तराखंड के पांच लाख परिवारों को ही लाभ मिल रहा था, इसलिए प्रदेश सरकार ने 25 दिसंबर को अटल आयुष्मान योजना शुरू कर सूबे के सभी 23 लाख परिवारों को पांच लाख तक का हेल्थ इंश्योरेंस देने की बात कही। इसके तहत लोगों द्वारा गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं, लेकिन जिन लोगों के गोल्डन कार्ड बन चुके हैं, उन्हें भी इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। लकड़ीपड़ाव निवासी समीम (40) पुत्र स्व. हाजी मोहम्मद सद्दीक को हार्ट संबंधी बीमारी होने पर कोटद्वार अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से चिकित्सकों ने उसे रेफर कर दिया। उसके भाई नईम माहगीर ने बताया कि समीम को 20 जनवरी को देहरादून जौलीग्रांट हास्पिटल ले गए, वहां चिकित्सालय प्रशासन को गोल्डन कार्ड का लाभ देने के लिए कहा गया, लेकिन चिकित्सालय प्रशासन ने गोल्डन कार्ड का लाभ देने से मना कर दिया। चिकित्सालय प्रशासन ने एंजियोग्राफी समेत कई जांचें कराईं और दवाइयां दीं। इसमें उनका करीब 32 हजार रुपये खर्च हुआ। परिजनों ने बताया कि सात दिन तक भी जब स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ और न ही उन्हें गोल्डन कार्ड का लाभ मिला तो परिजन उन्हें पंत मेडिकल कालेज (दिल्ली) ले गए। पंत मेडिकल कालेज में उन्हें उपचार तो निशुल्क मिला, लेकिन दवाइयां और उपकरण बाहर से मंगाए गए।
हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ जौलीग्रांट के एमएस वाईएस बिष्ट ने कहा कि आयुष्मान योजना स्वास्थ्य के क्षेत्र में सबसे बेहतर योजना है, लेकिन इसमें अभी कुछ तकनीकी खामियां हैं, जिसमें सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि योजना के तहत ओपीडी को इसका लाभ नहीं मिलता। भर्ती मरीजों को भी इस योजना के तहत लाभ देने के लिए चिकित्सालय को राज्य सरकार की अनुमति लेनी आवश्यक है।
विज्ञापन
विज्ञापन


-फोटो
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें