कालागढ़/कोटद्वार। एनजीटी के आदेश के तहत पौड़ी जिला प्रशासन ने शनिवार को जेसीबी से सरकारी भवन और इमारतें ध्वस्त कर जमीन वन विभाग के सुपुर्द की। जनता के विरोध को दरकिनार करते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से बेदखली की कार्रवाई की गई। इस दौरान आवासीय कालोनी टूटने पर उनमें रह रही महिलाएं बिलखने लगी।
शनिवार को प्रशासन ने भवनों को ध्वस्त करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स को कालागढ़ बुला लिया था। प्रशासन की ओर से आवासीय कालोनी में रह रहे लोगों को एनजीटी के आदेश सुनाते हुए कार्रवाई की बात कही। कहा कि रामगंगा बांध परियोजना की अवशेष भूमि वन विभाग को लौटाने की कवायद चल रही है। इसी क्रम में अंतिम चरण की कार्रवाई चल रही है। शनिवार को सबसे पहले सरकारी आवास और भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। इसके तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, गढ़वाल विकास निगम की गैस एजेंसी, ऊर्जा निगम, डाकघर, उपकोषागार, राम रहीम मिलन केंद्र, धर्मशाला की विशाल इमारतें जेसीबी से ध्वस्त की गई। नई कालोनी में मुख्य मार्ग पर स्थित दुकानों और खो खों को उनके स्वामियों ने खुद ही हटा लिया।
केंद्रीय कालोनी में पहुंची प्रशासन की टीम ने बड़ी संख्या में आवास ध्वस्त कर दिए। कालोनीवासियों का आरोप है कि प्रशासन की टीम ने घरों में रह रहे नागरिकों का सामान जबरन बाहर निकलवाया। अजमत अली, रहीस अहमद और तेजपाल सिंह का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें सामान तक निकालने नहीं दिया। घर पर ही जेसीबी चला दी। इसका महिलाओं ने विरोध किया।
नई कालोनी में डी आवासीय क्षेत्र में प्रशासन की टीम ने जबरन मकानों को ध्वस्त किया। बेदखली की कार्रवाई से महिलाएं बिलखने लगीं। उप डाकपाल लक्ष्मी शंकर पाल ने बताया कि डाकघर भवन से पंखों को भी नहीं उतारने दिया गया। टीम में सीओ जेआर जोशी, उपप्रभागीय वनाधिकारी आरके तिवारी, सहायक अभियंता एमके लखवाड़, रेंजर आरके भट्ट ने कार्रवाई को अंजाम दिलाया। देर शाम तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जारी रही। एसडीएम कोटद्वार कमलेश मेहता ने बताया कि ध्वस्तीकरण का लक्ष्य 192 भवनों का है। शनिवार देर शाम तक नई कालोनी में 42 भवन ध्वस्त किए गए।