कोटद्वार। उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी मोर्चा ने राज्य गठन के 17 साल बाद भी आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण की स्पष्ट नीति तैयार न होने पर नाराजगी प्रकट करते हुए एक बार फिर आंदोलन की चेतावनी दी है। कहा कि गत नौ नवंबर को 17 दिन तक कोटद्वार तहसील में चले धरना-प्रदर्शन के बाद वन एवं पर्यावरण मंत्री डा. हरक सिंह रावत के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त किया गया था, लेकिन आज तक उनकी एक सूत्री मांग पर कार्रवाई नहीं हुई है। चेतावनी दी है कि एक दिसंबर से फिर आंदोलनकारी धरना-प्रदर्शन के साथ ही उग्र आंदोलन को विवश होंगे।
यहां गोखले मार्ग स्थित एक गेस्ट हाउस में हुई बैठक में सर्वप्रथम वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी खुशालमणि बड़थ्वाल और एडवोकेट देवानंद नौटियाल के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि दी गई। कहा कि अपना पूरा जीवन उत्तराखंड राज्य आंदोलन के लिए देने वालों की सरकार सुध नहीं ले रही है। आंदोलनकारी केवल यह मांग कर रहे हैं कि पूरे राज्य में चिह्नीकरण का एक ही मानक होना चाहिए, जिसके लिए जल्द शासनादेश जारी कर उसका क्रियान्वयन हो। कहा कि 30 नवंबर तक सरकार के रुख का इंतजार किया जाएगा। एक दिसंबर से फिर से आंदोलनकारी सड़कों पर उतरकर तहसील में धरना-प्रदर्शन शुरू कर देंगे। बैठक की अध्यक्षता महेंद्र सिंह रावत और संचालन महामंत्री गुलाब सिंह रावत ने किया।
बैठक में राजकुमार गुप्ता, नंदन सिंह रावत, दिनेश चंद्र, भगवती प्रसाद कंडवाल, हयात सिंह गुसाईं, अशोक कंडारी, पंकज उनियाल, समीम अब्बासी, संजू, अर्चना दुतपुड़ी, सरस्वती देवी, मीना मैंदोला, मंजू शर्मा, संगीता रावत, बसंती देवी, मतलूब अहमद मौजूद थे।