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सुखरौ नदी से तटवर्ती गांवों को बाढ़ और कटाव का खतरा

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कोटद्वार। पश्चिमी ध्रुवपुर के ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से सुखरो नदी के तटवर्ती भागों का सर्वे कराने और मजबूत चेक डैम बनाने की मांग की है। कहा कि सुखरौ नदी से तटवर्ती गांवों पर भू कटाव और बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। समय रहते यदि इंतजाम नहीं हुए तो भारी बारिश में तबाही हो सकती है। खेत खलिहानों की सुरक्षा बड़ा सवाल बन गया है।
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विद्या दत्त जदली की अध्यक्षता में हुई बैठक में ग्रामीणों ने गत तीन और चार अगस्त की रात को बादल फटने के बाद आई भीषण बाढ़ से उपजे हालात और सुखरौ नदी से भू कटाव पर चिंता जताई। लोगों ने कहा कि भीषण बाढ़ से सुखरौ नदी के किनारे के सभी चेक डैम बह गए हैं, ऐसे में ध्रुवपुर, पदमपुर, सिमलचौड़, नयागांव को बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। भारी बारिश में नदी का पानी आबादी में घुसने का डर बना है। ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से आपदा प्रभावित क्षेत्र का व्यापक सर्वे कर मजबूत चेक डैम बनाने की मांग की गई।
बैठक में जगदीश सिंह बिष्ट, चंद्रप्रकाश, आनंद सिंह राणा, विजयपाल सिंह, राजेंद्र सिंह, राकेश सिंह, अर्जुन सिंह, रमेश जखमोला, ओमप्रकाश जदली, सुनील जखवाल, वीरेंद्र असवाल, देवीप्रसाद, पीतांबर जखवाल, गोविंद सिंह भंडारी, रोशनलाल व धर्मानंद आदि मौजूद थे।
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तेेलीसोत गदेरे की सुध न लेने से ग्रामीणों में रोष
किशनपुर (भाबर)। गत तीन और चार अगस्त की रात आई भीषण बाढ़ से भाबर के तेेलीसोत गदेरे के तटवर्ती गांवों में बड़े पैमाने पर खेत खलिहानों में कटाव हुआ है। कोटद्वार-चिलरखाल मार्ग पर तेेलीसोत गदेरे पर बना रपटा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। रपटे की सुध न लेने से क्षेत्रवासियों में रोष बना हुआ है।
ग्रामीण कुंवर सिंह, चंद्रकांता केष्टवाल, बीरेंद्र प्रसाद, विमल प्रसाद शुक्ला, मगनपुर के प्रधान विजय ध्यानी ने कहा कि तेेलीसोत गदेरे से बड़े पैमाने पर तटबंधों को नुकसान हुआ है। चिलरखाल मार्ग पर बने रपटे की दस दिन बाद भी सुध न लिए जाने से यहां पर आवाजाही करना खतरनाक बना है। ग्रामीणों ने तेलीसोत गदेरे पर पुल का निर्माण करने की मांग की। बच्चों का स्कूल जाना भी बंद हो जाता है।
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