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प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर बढ़ाएं आर्थिकी: डा. एनके शर्मा

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सतपुली। भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून और नेताजी सुभाष चंद्र बोस एजुकेशनल सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में कल्जीखाल ब्लाक के भुवनेश्वरी मंदिर सांगुड़ा (बिलखेत) में दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू हुई। कार्यशाला में काश्तकारों की आर्थिकी बढ़ाने के लिए नगदी और बेमौसमी सब्जियों के उत्पादन पर जोर दिया गया।
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कार्यशाला में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से संचालित योजनाओं की जानकारी दी गई। कार्यशाला के पहले दिन भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. एनके शर्मा, डा. धर्मवीर सिंह, प्रधान वैज्ञानिक मृदा डा. राजेश कौशल, प्रिंसिपल साइंटिस्ट फॉरेस्ट्री एवं डा. राकेश कुमार ने पर्वतीय कृषि को लाभप्रद और किसान की रुचि के अनुकूल बनाने पर जोर दिया। कहा कि किसानों को प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर बांस की खेती, मत्स्य एवं मुर्गी पालन से आर्थिकी बढ़ाने के तरीकों को अपनाना चाहिए। इसके साथ ही बेमौसमी सब्जियों के उत्पादन, एकीकृत कृषि से आजीविका संवर्द्धन करना चाहिए। कार्यक्रम में अभिनव नेगी, रमेश गड़िया, सुनील नैथानी, अरुण काला, मलिकराज डोबरियाल समेत क्षेत्र के तीन दर्जन से अधिक ग्रामीण मौजूद थे।
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