कोटद्वार। लैंसडौन वन प्रभाग के कोटद्वार रेंज के अंतर्गत मालन बीट में सोमवार की रात एक बार फिर वन कर्मियों से खननकारी भिड़ गए। उन्होंने जंगल में लगी आग की आड़ में वन कर्मियों को खरी-खोटी सुनाते हुए जमकर अभद्रता की। वन कर्मियों का कहना है कि गत चार मई की रात की घटना में दर्ज एफआईआर में भी पुलिस की ओर से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे वन कर्मियों का मनोबल घटता जा रहा है।
कोटद्वार के मालन बीट में वन कर्मियों और खननकारियों के बीच टकराव की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इससे वन कर्मियों में आक्रोश के साथ ही निराशा का माहौल बना हुआ है। सोमवार की रात करीब साढ़े दस बजे जब वन कर्मचारी मालन वन रक्षक चौकी जगदेव मंदिर में आग बुझाने के बाद बैठे थे, तभी पूर्व के मुकदमों में नामजद खननकारी अपने साथियों के साथ वहां आ धमके। खननकारियों ने जंगल में लगी आग की आड़ में वन कर्मियों को खरी-खोटी सुनाई। वन कर्मियों का आरोप है कि खननकारियों ने उनके साथ अभद्रता की। उन्होंने अपने उच्चाधिकारियों को मामले की सूचना दी है। कोटद्वार के रेंज अधिकारी एसपी कंडवाल ने सोमवार रात की घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि अवैध खनन रोकने के लिए उच्चाधिकारियों से पुलिस फोर्स की मांग की गई है।
पांच साल में दर्ज किए गए 10 से अधिक मुकदमे, नतीजा सिफर
कोटद्वार। वर्ष 2013 से 2018 तक के पांच सालों में वन कर्मियों से मारपीट, बंधक बनाने, जबरर्दती ट्रैक्टर-ट्राली छुड़ाकर ले जाने, जान से मारने की धमकी, ट्रैक्टर से कुचलने के प्रयास, वर्दी फाड़ने और राजकीय वाहन में तोड़फोड़ के मामलों में दस मुकदमे पुलिस के पास दर्ज कराए गए हैं, लेकिन कानूनी कार्रवाई न होने से खननकारियों के हौसले बुलंद हैं। कोतवाल उत्तम सिंह जिमिवाल का कहना है कि चार मई की घटना की तहरीर के आधार पर जांच चल रही है। इस मामले में वन अधिकारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। लैंसडौन के डीएफओ संतराम ने वन कर्मियों पर गश्त के दौरान खननकारियों के हमले की घटनाओं पर चिंता जताई है। उन्होंने जिलाधिकारी और एसएसपी पौड़ी को पत्र लिखकर प्रभावी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।