कोटद्वार। राजकीय संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार में डिलीवरी के बाद माता और उसके नवजात शिशु को घर तक सकुशल छोड़ने की जिम्मेदारी संभालने वाली एंबुलेंस सेवा ‘खुशियों की सवारी’ बदहाल है। नेशनल एंबुलेंस सर्विस (एनएएस) प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि पिछले छह महीने से ‘खुशियों की सवारी’ वाहन के सभी टायर पूरी तरह से घिसकर फटने की कगार पर हैं। टायरों के रैम पर दरार पड़ी हुई है। ऐसे में पहाड़ी क्षेत्रों में नवजात शिशु और उसकी माता को लेकर दौड़ रहा वाहन कब दुखद हो जाए, कहना मुश्किल है।
राजकीय संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार में पौड़ी जिले के करीब एक तिहाई क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं के कार्ड बने हुए रहते हैं। महिलाओं की डिलीवरी के बाद प्रदेश सरकार की ओर से माता और बच्चे को उनके घर तक सकुशल छोड़ने के लिए ‘खुशियों की सवारी’ एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है, लेकिन एंबुलेंस प्रशासन का वाहन की मेंटीनेंस पर ध्यान नहीं है। कर्मचारियों की मानें तो वे पिछले छह महीने से एंबुलेंस के टायरों की डिमांड भेज रहे हैं, लेकिन एंबुलेंस प्रशासन लापरवाह बना हुआ है।
कोटद्वार अस्पताल से ‘खुशियों की सवारी’ कोटद्वार शहर, भाबर, सनेह क्षेत्र, पर्वतीय क्षेत्रों में दुगड्डा, डाडामंडी, द्वारीखाल, गुमखाल, जयहरीखाल, लैंसडौन, बीरोखाल, बैजरों, रिखणीखाल, धुमाकोट, नैनीडांडा, काशीपुर, सतपुली, कल्जीखाल आदि स्थानों तक महिलाओं और उनके नवजात बच्चे को घर छोड़ने के लिए जाती है। यही नहीं, कई बार स्कूल हेल्थ प्रोग्राम के तहत बच्चों को लेकर दिल्ली और देहरादून का सफर करना पड़ता है। ऐसे में चलते वाहन के टायर फटने से दुर्घटना की पूरी आशंका बनी हुई है।
क्या कहते हैं अधिकारी
‘खुशियों की सवारी’ के टायर घिसने का मामला गंभीर है। हालांकि इसकी व्यवस्था एनएएस देखता है, लेकिन महिलाएं हमारे अस्पताल से जाती हैं, इसलिए इसके लिए एनएएस प्रशासन को पत्र लिखा जाएगा।
- डा. आईएस सामंत, सीएमएस राजकीय संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार
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