कोटद्वार। 3/4 अगस्त की रात कोटद्वार क्षेत्र में आई आपदा शहर से लेकर गांवों तक गहरे जख्म दे गई है। बादल फटने के बाद आई बाढ़ से पूरे इलाके की सिंचाई व्यवस्था चौपट हो गई है। करीब 43 गांवों को सिंचाई सुविधा प्रदान करने वाली मालन मेन फीडर दर्जनों स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई है। मालन मेन फीडर से निकलने वाली दाईं और बाईं मालन नहरें कहीं मलबे से दब गई हैं तो कहीं उनका नामोनिशान मिट गया है। क्षेत्र की सात बड़ी नहरों से सिंचाई व्यवस्था ठप हो गई है। इन नहरों की जल्द मरम्मत नहीं की गई तो खरीफ की फसल के साथ ही रवि की फसल पर इसका असर पड़ेगा। आपदा से सिंचाई विभाग द्वारा बनाई गई करोड़ों रुपये की बाढ़ सुरक्षा दीवारें गायब हो गई हैं।
पौड़ी जिले में कोटद्वार भाबर का इलाका कृषि प्रधान माना जाता है। यहां खेतों की सिंचाई के लिए अंग्रेजों के जमाने में मालन मेन फीडर का निर्माण हुआ था। इससे दाईं और बाईं मालन नहर प्रणाली विकसित की गई हैं। तीन और चार अगस्त की रात ये नहरें पहाड़ी से आए मलबे में दब गई हैं। कई स्थानों पर नहरें टूटकर मालन नदी में समा गई हैं। मालन फीडर केनाल की दाईं मालन नहर बिजनौर तक के इलाके की सिंचाई करती हैं। उदयरामपुर, किशनपुर, हल्दूखाता फीडर, र्बाइं मालन नहर से निकलने वाली निंबूचौड़, सत्तीचौड़, ग्वालगढ़, जामुनवाली फीडर दुर्गापुर माइनर भी बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं। आपदा से गिवईं नहर, बाईं और दाईं खोह नहरें, कौडिया माइनर, सिगड्डी नहर, सुखरौ नहर, शिवपुर माइनर, पदमपुर माइनर और सिमलचौड़ माइनर को भी बड़े पैमाने पर क्षति पहुंची है। नहरें क्षतिग्रस्त होने से धान की फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। अधिकारियों की मानें तो प्रारंभिक आकलन में सिंचाई नहरों को करीब 4.64 करोड़ का नुकसान हुआ है।
यहीं हाल बाढ़ सुरक्षा दीवारों का है। हाल में ही करोड़ों रुपये की लागत से बनी मालन फीडर बाढ़ सुरक्षा दीवार, तेलीस्रोत बाढ़ सुरक्षा दीवार, पनियाली, बहेड़ास्रोत, जामुनस्रोत, किड़ी स्रोत, हरकिशन स्रोत, डूमस्रोत, खोह नदी बाढ़ सुरक्षा कार्य, मालन नदी तटबंध कार्य, सिमलचौड़, ग्वालगढ़, जगदेव नाला और गिवईंस्रोत नाले पर किए गए बाढ़ सुरक्षा कार्य भी बाढ़ में बह गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि आपदा से करीब 9.29 करोड़ के बाढ़ सुरक्षा इंतजाम बह गए हैं। एसडीओ चंडीप्रसाद भट्ट ने कहा कि कई स्थानों पर सुरक्षा दीवार बाढ़ की चपेट में आई है, लेकिन तेलीस्रोत, पनियाली और गिवईं स्रोत में बनी बाढ़ सुरक्षा दीवारों से जानमाल के साथ ही खेत खलिहानों की सुरक्षा भी हुई है।
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